खंडवा में शिक्षक पद पर जॉइनिंग देने पहुंचीं सुधा।
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मध्यप्रदेश की एक महिला सरपंच को आदिवासी बालिकाओं के लिए काम करने की ऐसी ललक जगी कि उन्होंने इसके लिए सरपंच पद से इस्तीफा दे दिया है। वे दमोह जिले से निर्विरोध निर्वाचित हुई थीं। उन्होंने खंडवा में शिक्षक बनने का विकल्प चुना है और वे इससे आदिवासी बालिकाओं का भविष्य संवारने का माध्यम बनाना चाहती हैं।
हम बात कर रहे हैं मध्यप्रदेश के दमोह जिले के पथरिया के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत सैजरा लखरौनी में सरपंच पद पर रहीं सुधा की। सुधा ने आदिवासी बालिकाओं के लिए राजनीति से मुंह फेर लिया है। सुधा खंडवा जिले के खालवा ब्लॉक के गुलाई माल में स्थित आश्रम स्कूल में शिक्षिका के रूप में बच्चों के भविष्य में उजियारा लाएंगी।
बता दें कि खंडवा जिले में शिक्षा विभाग अंतर्गत वर्ग 3 के पद पर नियुक्ति के लिए दस्तावेजों का परीक्षण का कार्य चल रहा है। इसी बीच जनजातीय कार्य विभाग खंडवा के सहायक आयुक्त उस समय चौंक गए, जब मध्य्प्रदेश के दमोह जिले से आई एक नवनियुक्त शिक्षिका के दस्तावेजों का परीक्षण किया गया। दरअसल महिला शिक्षिका के दस्तावेजों में सरपंच पद से दिया गया इस्तीफा भी शामिल था, जिसकी पड़ताल करने पर मालूम चला के महिला अब तक दमोह जिले के पथरिया के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत सैजरा लखरौनी में सरपंच पद पर थीं। महिला सुधा का चयन सरपंच पद पर निर्विरोध हुआ था। आदिवासी समाज से आने वाली सुधा अपने समाज और गांव के लिए कुछ करने की चाह में ही सरपंच बनी थीं। लेकिन जब उनका चयन आदिवासी अंचल में वर्ग 3 के शिक्षक पद पर हो गया तो उन्होंने बच्चों में शिक्षा का उजियारा फैलाने की अपनी चाह के चलते सरपंच पद से इस्तीफा देकर खंडवा ज्वाइनिंग कर ली। फिलहाल सुधा ने खंडवा जिले के खालवा ब्लॉक के गुलाई माल स्थित आश्रम स्कूल में आमद दे दी है। इनका कहना है कि सरपंच रहकर तो मैं एक गांव का ही विकास कर पाती। लेकिन, अब शिक्षिका बनकर कई बच्चों के जीवन में बदलाव ला सकूंगी।