मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में अभी भी बाढ़ का खतरा बना हुआ है। यहां पर चंबल और पार्वती नदी उफान पर है, जिसके चलते मुरैना, भिंड और श्योपुर के 100 से ज्यादा गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। गांव के लोगों का बचाव कर शिफ्ट किया गया है। कोटा बैराज के पानी छोड़ने से चंबल नदी उफान पर है। चंबल का जलस्तर 146.2 मीटर है, जबकि डेंजर लेवल का स्तर 138 मीटर है। यमुना नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है। इसके चलते चंबल का पानी यमुना में नहीं जा पा रहा है। चंबल का जलस्तर शाम तक 147 मीटर तक जाने का अनुमान है। इससे 56 गांव के और प्रभावित होने का अनुमान है। मुरैना में 2 एनडीआरएफ और 7 एसडीईआरएफ की टीमें तैनात की गई हैं। मुरैना में एक हेलिकॉप्टर से बाढ़ में फंसे गांव से लोगों को निकाला जा रहा है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें भी बाढ़ में फंसे लोगों को बाहर निकाल रही हैं।
भिंड में चंबल अपने डेंजर लेवल 119 मीटर से ऊपर 127.9 मीटर पर बह रही है। इसका जलस्तर शाम तक 128.5 मीटर तक जाने का अनुमान है। इसके 10 गांवों को ज्यादा प्रभावित करने का अनुमान है। यहां पर 4 एसडीआरएफ की टीम बचाव में लगी है। यहां पर बाढ़ में फंसे ग्रामीणों को हेलिकॉप्टर से फूड पैकेट्स उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
विदिशा में बेतवा अपने डेंजर लेवल से 1.5 फीट ऊपर बह रही है। बुधवार को बेतवा अपने डेंजर लेवल से 6 फीट ऊपर बह रही थी। आज सुबह बेतवा का डेंजर लेवल से 3 फीट ऊपर था। इसका पानी तेजी से कम हो रहा है। यहां पर स्थिति सामान्य होती जा रही है।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोगों से अपील की है कि चंबल बेसिन में न जाएं। सावधान रहें। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि खाने के पैकेट, आवश्यक सामग्री की व्यवस्था रखें। जहां जरूरी है वहां दिन में बचाव करें और रात का इंतजार न करें। हेलिकॉप्टर का उपयोग कर लोगों को निकालकर राहत कैंप पहुंचाएं। सीएम ने अधिकारियों से कहा कि जनप्रतिनिधियों को साथ लेकर जनभागीदारी के साथ लोगों की मदद करने में जुटें। लोगों को लगातार जागरूक करें, सावधानी बरतने को कहें। सीएमओ और सिचुएशन रूम से लगातार संपर्क में रहें और जरूरत लगे तुरंत सूचित करें। सीएम ने कहा कि गांधी सागर बांध और कोटा से पानी कम छोड़ा जा रहा है। हम सतर्क और सावधान हैं।
सीएम ने चंबल क्षेत्र के तीनों कलेक्टरों को भोजन और पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिलों में तीन एयरफोर्स के हेलिकॉप्टर बचाव कार्य में लगे हैं। आपदा दल भी निरंतर कार्य कर रहे हैं। सीएम ने कमिश्नर ग्वालियर से भी बाढ़ राहत कार्यों में समन्वय की जानकारी प्राप्त की।
सीएम ने कहा कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद हम दवाईयों को छिड़काव ताकि बीमारी न फैले। शुद्ध पेयजल की आपूर्ति बहाल करना और राहत शिवरों में लगातार सुविधाएं उपलब्ध कराना। जब तक कि घर रहने लायक नहीं हो जाते है। चाय-पानी, भोजन का इंतजाम शिवरों में जारी रहेगा। सीएम ने कहा कि इसके बाद नुकसान का आकलन, मेडिकल चेकअपन के लिए अलग-अलग शिविर लगाना और उसके बाद फिर हम फसलों, घरों और घरों में रखे सामान और जनता को राहत की राशि का वितरण करेंगे।
10 मार्ग अभी भी बंद
प्रदेश में अभी भी 10 मार्ग बंद हैं। दरअसल 24 घंटे से बारिश थमी है, जिसके बाद कैचमेंट के पानी से नदी-नाले उफान पर हैं। इसके चलते भोपाल-नागपुर, होशंगाबाद- पिपरिया, होशंगाबाद- हरदा, श्योपुर-कोटा, श्योपुर-बारा, श्योपुर-सवाईमाधोपुर, रायसेन-सांची समेत 10 मार्ग बंद हैं।