दमोह में बाल विवाह रोकने के लिए गई टीम समझाइश देते हुए।
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अक्षय तृतीया पर विवाह का शुभ मुहूर्त होता है और लोग अपने बच्चों का विवाह संपन्न करते हैं। दमोह के तेजगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत एक गांव में 12 साल की लड़की का विवाह तेंदूखेड़ा थाना क्षेत्र में रहने वाले 26 साल के लड़के के साथ होने वाला था। विवाह की रस्मों के बीच ही मामला चाइल्डलाइन के पास पहुंच गया। उसने पुलिस और महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम से संपर्क किया और यह विवाह रुकवाया।
अधिकारी और पुलिस लड़के के घर पहुंची। बालिका की उम्र के दस्तावेज आधार कार्ड और स्कूल का दाखिला देखा। उसमें पता चला कि लड़की की उम्र 12 साल 8 माह है। लड़के की अंकसूची के अनुसार वह 26 साल का है। वर-वधु पक्ष को बताया गया कि बाल विवाह अधिशेष 2006 के अंतर्गत लड़की की उम्र 18 वर्ष से कम और लड़के की उम्र 21 वर्ष से कम हो तो उसे बाल विवाह माना जाता है। इस विवाह में सम्मिलित होने वाले प्रति व्यक्ति पर एक लाख रुपये के जुर्माने और दो साल की सजा का प्रावधान है।
बालिका के परिजनों ने बताया कि हम लोगों को कानूनी जानकारी नहीं थी। इस वजह से विवाह कर रहे थे। अब हम शादी रोक रहे हैं। अधिकारी लड़के के यहां भी गए। उसकी भी अंकसूची जांची। टीम को उम्र और निवास की पहचान के दस्तावेज देने में परिवार के लोग आनाकानी कर रहे थे। कहने लगे कि किसने शिकायत की है। हमारा नाम बदनाम हो गया इसलिए अब हम यह विवाह नही करेंगे। बाल विवाह रोकने वाली टीम से चाइल्ड लाइन काउंसलर दीपिका ठाकुर, एसआई प्रदीप चौधरी और महिला बाल विकास विभाग से नंदराम अहिरवार और आगनवाड़ी कार्यकर्ता अर्चना अहिरवार ने मिलकर यह कार्यवाही की।