मध्य प्रदेश में गेहूं के बम्पर उत्पादन को देखते हुए राज्य सरकार ने एक्सपोर्ट करने का फैसला किया है। इसके लिए एक्सपोर्टर्स को हरसंभव सुविधा देने की कोशिश की जाएगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसी कड़ी में गुरुवार को एक्सपोर्ट होने वाले गेहूं पर मंडी टैक्स नहीं लेने और एक्सपोर्टर्स को ग्रेडिंग व सॉर्टिंग पर होने वाले खर्च का भुगतान करने का फैसला लिया है।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को दिल्ली में उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति की मौजूदगी में एक्सपोर्टर्स से बातचीत की। इसके बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश गेहूं उत्पादन का केंद्र बन चुका है। दो वर्षों में राज्य सरकार ने 1.29 करोड़ मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की है। मध्य प्रदेश के शरबती गेहूं को गोल्डन ग्रेन कहा जाता है। एमपी व्हीट के नाम से इसकी पूरे देश में साख है। कई कंपनियां आटा बनाकर बेचती है तो उसे भी एमपी व्हीट के नाम से बेचा जाता है। हमारे पास गेहूं के भंडार भरे पड़े हैं। अगली फसल भी जबरदस्त आ रही है। बम्पर फसल की वजह से गेहूं हमारे लिए समस्या बन जाता था। पर अब गेहूं मध्य प्रदेश की ताकत होगा। हम दुनियाभर में गेहूं को एक्सपोर्ट करेंगे। इसके लिए एक्सपोर्टर्स से बातचीत की। उनकी समस्याओं को जानने और उन्हें दूर करने की कोशिश की।
एक लाइसेंस पर होगी खरीद
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में एक लाइसेंस पर कोई भी कंपनी या व्यापारी कहीं से भी गेहूं खरीद सकेगा। वह चाहे मंडी से खरीदे या मंडी के बाहर से। वह किसान के घर या खेत से भी खरीदारी कर सकती है। मंडी में बिकने वाले गेहूं की वैरायटी और ग्रेड का भी उल्लेख होता है। हमने तय किया है कि मंडी में नीलामी की प्रक्रिया और ऑनलाइन अनुज्ञा का लाभ एक्सपोर्टर स्वयं या अपने किसी स्थानीय व्यापारी के पंजीयन से ले सकते हैं।
प्रमुख मंडियों में लैब उपलब्ध कराएंगे
सीएम ने कहा कि फसल के वैल्यू एडिशन और क्वालिटी सर्टिफिकेशन के लिए प्रमुख मंडियों में इंफ्रास्ट्रक्चर और लैब उपलब्ध कराई जाएगी. प्रमुख मंडियों में एक्सपोर्टर को अधोसंरचना के लिए जमीन की आवश्यकता होने पर रियायती दरों पर जमीन देंगे। प्रदेश में किसानों से गेहूं खरीदने पर ग्रेडिंग और सॉर्टिंग करनी पड़ी तो उसके खर्च का भुगतान भी एक्सपोर्टर्स को किया जाएगा। निर्धारित किस्म, ग्रेड और ग्रुणवत्ता वाली फसल के भंडारण और प्रमाणीकरण के लिए पेशेवर और प्रतिष्ठित एजेसियों से अनुबंध कर निर्यात के लिए अस्थायी व्यवस्था भी बनाई जाएगी।
रेलवे ने रैक देने का भरोसा दिया
सीएम ने कहा कि रेलवे के रैक मिलने में दिक्कत होती थी। रेलवे बोर्ड के अधिकारियों ने बैठक के दौरान रैक की कमी नहीं होने देने का आश्वासन दिया है। साथ ही पोर्ट पर भी गेहूं रखने की जगह मिलेगी। निर्यातक किसी भी पोर्ट से निर्यात कर सकेंगे। इन फैसलों से मध्य प्रदेश के गेहूं का निर्यात तेजी से बढ़ने की उम्मीद की जा रही है, जिसका फायदा किसानों को मिलेगा।