मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ऑल इंडिया राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार होंगे। गुरुवार को दिग्विजय सिंह ने नामांकन फॉर्म लिया। उन्होंने कहा कि वह शुक्रवार को अपना नामांकन फॉर्म भरेंगे। वहीं, दूसरी तरफ राजस्थान के सियासी घमासन के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दिल्ली में सोनिया गांधी से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है। शशि थरूर ने भी नामांकन भरने की बात कही है। शशि थरूर ने दिग्विजय सिंह के साथ गले मिलते हुए एक फोटो शेयर कर लिखा कि हमारी लड़ाई प्रतिद्वंद्वियों के बीच नहीं बल्कि सहयोगियों के बीच एक दोस्ताना मुकाबला है। ऐसे में अब दिग्विजय सिंह और शशि थरूर के बीच कांग्रेस अध्यक्ष के लिए चुनाव होने की संभावना है। इसमें 75 वर्षीय दिग्विजय सिंह का पलड़ा भारी दिख रहा है।
22 की उम्र में लड़ा पहला चुनाव
मैकेनिकल इंजीनियरिंग से स्नातक दिग्विजय सिंह को सियासत विरासत में मिली है। मध्य प्रदेश की राघौगढ़ रियासत के राजपरिवार से आने वाले दिग्विजय सिंह के पिता बलभद्र सिंह भी विधायक थे। दिग्गी ने 1969 में राघौगढ़ नगर पालिका का चुनाव लड़ा और जीता था। उस समय उनकी उम्र 22 साल थी। इसके बाद दिग्विजय सिंह का राजनीतिक सफर आगे बढ़ता गया। 53 साल के राजनीतिक करियर में कई उतार-चढ़ाव देखने वाले दिग्विजय सिंह आज भी राजनीति में सक्रिय बने हुए हैं।
ऐसा चला राजनीतिक सफर
1977 में दिग्विजय सिंह राघौगढ़ से ही विधायक चुने गए। 1978 में वे प्रदेश युवा कांग्रेस के महासचिव बने। 1980 के चुनाव में राघौगढ़ से चुने गए और अर्जुन सिंह ने अपने मंत्रिमंडल में जगह दी। कैबिनेट मंत्री के रूप में कृषि, पशुपालन एवं मत्स्य पालन, सिंचाई क्षेत्र के विकास के लिए कार्य किया। 1984 और 1992 में राजगढ़ निर्वाचन क्षेत्र के सांसद के रूप में चुने गए। इस दौरान उनको मध्य कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनने का भी मौका मिला।