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प्रचार के आखिरी समय तेज हुआ राजनीतिक घमासान

Fri, 22 Nov 2013 01:46 PM IST
जयप्रकाश पाराशर, भोपाल
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नवंबर के ठिठुरते अंतिम सप्ताह में मध्य प्रदेश की राजनीति का तापमान चरम पर पहुंच गया है, जहां जाकर तर्क और अक्ल की बातें पिघलने लगी हैं।
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आरोपों और प्रत्यारोपों की धुंध गहरी हो गई है। सभाएं कर-करके नेताओं के गले रुंध गए हैं, पैरों में छाले पड़ गए हैं और स्नायुतंत्र एक मशीन की तरह भाषण उगल रहा है।

23 नवंबर, शनिवार शाम पांच बजे प्रचार बंद होने के पहले हर कोई अपना सारा ईंधन झोंक देना चाहता है। जब अलाव सुर्ख है, मध्य प्रदेश के आकाश में हेलिकाप्टरों की गड़गड़ाहट और आवाजाही तेज से तेजतर हो गई है।
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शुक्रवार को नरेंद्र मोदी 4 सभाएं लेकर कांग्रेस और गांधी परिवार को ध्वस्त कर देना चाहते हैं। उधर कांग्रेस के भविष्य की खोज में लगा अनगढ़ राहुल गांधी विचारक की मुद्रा में दो सभाएं लेकर मध्य प्रदेश के आदिवासियों और वंचित वर्ग को संदेश दे देना चाहता है।

धीरे से भाजपा की राजनीति में दरकिनार किए गए लालकृष्ण आडवाणी भी एक होशियार बुजुर्ग की तरह अपनी प्रासंगिकता को खत्म नहीं होने देना चाहते। वह सभाएं ले रहे हैं तो मुरली मनोहर जोशी को ब्राह्मण बहुल रीवा विंध्य क्षेत्र में भेजा जा रहा है।

हेमामालिनी बसंती के डायलॉग सुना रही है और कॉमेडी शो से निकलकर नवजोत सिद्दू सियासत के मंच पर अवाम को हंसाने आ गए हैं।

भाजपा का शिविर
छत्तीसगढ़ के चुनाव से थके डॉ. रमनसिंह मसाज कराने नहीं गए, वह मध्य प्रदेश के समरांगण में उतर पड़े हैं। छत्तीसगढ़ से सटे इलाकों में वह सभाएं करने लगे हैं।

नरेंद्र मोदी की चार सभाएं निमाड़ और मालवा में रखी गई हैं। नरेंद्र मोदी खंडवा, बड़वानी और इंदौर के साथ-साथ उस झाबुआ में संबोधित करने वाले हैं, जहां मेघनगर में एक दिन पहले ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राज्य सरकार पर हल्ला बोला था। हेमामालिनी आज भी श्योपुर में शोले के संवाद सुनाने वाली हैं। लंबे समय तक दस्युग्रस्त रही श्योपुर की अवाम ‘शोले’ के संवादों पर तालियां पीटे तो आश्चर्य नहीं।  

भाजपा के वयोवृद्ध नेता आडवाणी बांधवगढ़, उमरिया और कटनी में सभाएं कर रहे हैं। उनका निशाना कांग्रेस पर होता है, अन्यता वह एक लोक इतिहासकार की तरह बताते हैं कि किस तरह एक समय मध्य प्रदेश में कुछ नहीं था और शिवराज ने उसे क्या से क्या बना दिया है।

शिवराज सिंह चौहान सभाओं में कह रहे हैं कि इतनी सभाएं करने की ताकत उन्हें भगवान दे रहे हैं। श्रोता हैरान हैं। शिवराजसिंह शुक्रवार को नरसिंहपुर में 3 और होशंगाबाद में 4 सभाएं करने वाले हैं। रात 2-3 बजे तक काम करने वाले चौहान अपने चुनाव क्षेत्र विदिशा में पत्नी साधना सिंह और बुदनी में बेटे कार्तिकेय सिंह को जिम्मा सौंपकर रोजाना 7-10 सभाएं कर रहे हैं। हेलिकाप्टर में खाना और मीडिया को साक्षात्कार साथ-साथ चल रहे हैं। देर रात रणनीतियां बनाई जा रही हैं। पर्दे के पीछे लोग स्क्रिप्ट लिखने में व्यस्त हैं।

सुषमा स्वराज शुक्रवार को पूरे विदिशा जिले में घूम रही हैं। नवजोत सिंह सिद्धू राऊ (इंदौर), विजयपुर और श्योपुर की जनता का मनोरंजन करेंगे। अरुण जेटली को नीमच में भाषण देने का काम सौंपा गया है।

प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को ग्वालियर-चंबल का 34 सीटों का गढ़ बचाने की चिंता है। जहां भाजपा को सबसे बड़ी चुनौती दरपेश है। तोमर ग्वालियर में भिंड और मुरैना की सभाएं कर रहे हैं। मुरैना को लेकर वे इतने चिंतित हैं कि वहां 6 सभाएं और 1 जनसंपर्क का व्यस्त कार्यक्रम है।

कांग्रेस का शिविर
कांग्रेस का शिविर क्षत्रपों के अलावा सोनिया गांधी और राहुल गांधी से करिश्मे की उम्मीद करता है। राहुल गांधी शुक्रवार को मल्हारगढ़ (मंदसौर) और बालाघाट में 2 सभाएं करने वाले हैं।

प्रचार समिति के प्रमुख ज्योतिरादित्य सिंधिया को शिवपुरी, गुना, ग्वालियर, अशोकनगर का ग्वालियर-चंबल क्षेत्र उर्वर दिखाई दे रहा है। वह दतिया भी जा रहे हैं, जहां शिवराज मंत्रिमंडल के मंत्री नरोत्तम मिश्रा राजनीतिक जीवन की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रहे हैं।

कमलनाथ ने कल्पना परुलेकर के समर्थन में महिदपुर के अलावा महू, बालाघाट का जिम्मा संभाला है। उनके वर्चस्व के छिंदवाड़ा में उनकी प्रतिष्ठा दांव पर है, जहां वह शुक्रवार को 4 सभाएं कर रहे हैं।

कपिल सिब्बल एक कुशल वकील की तरह प्रेस कांफ्रेंस में जिरह कर रहे हैं और शिवराज को चुनाव से पहले ही मुकदमा हरा देना चाहते हैं। उनकी राय है कि उनका सरनेम चौहान होता तो उन्हें भी म.प्र. में कुछ प्लॉट मिल जाते। वे अब मोदी के बाद शिवराज सिंह चौहान को विकास पर बहस की चुनौती दे रहे हैं, जब उनकी चुनौती ग्रहण करने का वक्त अरुण जेटली के पास भी नहीं।  

हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा अपने राज्य में बड़ी रैली करने के बाद स्टार प्रचारक हो गए हैं। वे होशंगाबाद इटारसी, सीहोर और इंदौर में सभाएं कर रहे हैं।

क्रिकेटर अजहरुद्दीन को ग्वालियर, करैरा, महगांव, कोलारस, ग्वालियर दक्षिण जैसे सिंधिया के गढ़ में प्रचार की कमान दी गई हैं, जहां शायद उनकी पीढ़ी के लोग उन्हें क्रिकेटर के तौर पर देखने आएं। श्रीकांत जेना को जबलपुर में भाषण देने के लिए कहा गया है, पता नहीं वहां कितने लोग उनका नाम जानते हैं।
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संघर्ष अब उबल रहा है। ये बिगुल-ढोल-नगाड़े शनिवार को शाम पांच बजे अचानक खामोश हो जाएंगे, तब अवाम के पास वक्त होगा कि इनमें सबसे कम बुरा कौन है। जिसे वह 25 नवंबर को चुने।
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