मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का विधानसभा क्षेत्र है बुधनी। बुधनी में ही एक नगर पंचायत है नसीरुल्लागंज। बुधनी और नसरुल्लागंज दोनों नगर पंचायतें हैं और इन दोनों के बीच की दूरी तकरीबन 50 किलोमीटर है। हमें इस 50 किलोमीटर की दूरी को तय करने में डेढ़ घंटे से ज्यादा का वक्त लगा। वजह सिर्फ यहां की बदहाल सड़कें थीं। स्थानीय लोग भी मानते हैं कि मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में सिर्फ बुधनी से नसरुल्लागंज की ही नहीं बल्कि और भी कनेक्टिंग सड़कें बदहाल हो चुकी हैं। अमर उजाला डॉट कॉम जब मध्यप्रदेश में चुनावी यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र बुधनी पहुंचा, तो लोगों ने बदहाल सड़कों से लेकर कई तरह की समस्याएं भी बताईं। हालांकि इन तमाम समस्याओं के बाद भी लोगों ने कहा कि वह वोट तो मामा को ही देंगे। क्योंकि मामा का कोई विकल्प ही नहीं है।
बुधनी के रहने वाले महराज कौशिक कहते हैं कि यह क्षेत्र मुख्यमंत्री शिवराज का है। इस लिहाज से पूरे मध्यप्रदेश में यह विधानसभा क्षेत्र सबसे प्रमुख और महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि अभी इस क्षेत्र में और भी विकास होने की जरूरत है, लेकिन उनका मानना है शिवराज चौहान के चुनाव जीतने से वह जरूरतें भी पूरी हो जाएंगी। कौन-कौन सी समस्याएं हैं, यह पूछने पर महाराज कहते हैं कि सड़कों को लेकर तो समस्याएं बनी ही रहती हैं। वह पूछते हैं कि आप बुधनी से कहां जाने वाले हैं। जब उन्हें यह बताया कि वह यहां से इसी विधानसभा क्षेत्र में एक और नगर पंचायत है नसरुल्लागंज, वहां जा रहे हैं, तो वह कहते हैं जब आप वहां जाएंगे तो अंदाजा हो जाएगा कि यहां की सड़कें कैसी हैं। तकरीबन 50 किलोमीटर की दूरी के लिए आपको डेढ़ घंटे से ज्यादा का वक्त लगेगा। सड़कों की स्थिति उतनी अच्छी नहीं है, जितनी एक मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में उम्मीद की जाती है।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का विधानसभा क्षेत्र है बुधनी। बुधनी में ही एक नगर पंचायत है नसीरुल्लागंज। बुधनी और नसरुल्लागंज दोनों नगर पंचायतें हैं और इन दोनों के बीच की दूरी तकरीबन 50 किलोमीटर है। हमें इस 50 किलोमीटर की दूरी को तय करने में डेढ़ घंटे से ज्यादा का वक्त लगा। वजह सिर्फ यहां की बदहाल सड़कें थीं। स्थानीय लोग भी मानते हैं कि मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में सिर्फ बुधनी से नसरुल्लागंज की ही नहीं बल्कि और भी कनेक्टिंग सड़कें बदहाल हो चुकी हैं। अमर उजाला डॉट कॉम जब मध्यप्रदेश में चुनावी यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र बुधनी पहुंचा, तो लोगों ने बदहाल सड़कों से लेकर कई तरह की समस्याएं भी बताईं। हालांकि इन तमाम समस्याओं के बाद भी लोगों ने कहा कि वह वोट तो मामा को ही देंगे। क्योंकि मामा का कोई विकल्प ही नहीं है।
बुधनी के रहने वाले महराज कौशिक कहते हैं कि यह क्षेत्र मुख्यमंत्री शिवराज का है। इस लिहाज से पूरे मध्यप्रदेश में यह विधानसभा क्षेत्र सबसे प्रमुख और महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि अभी इस क्षेत्र में और भी विकास होने की जरूरत है, लेकिन उनका मानना है शिवराज चौहान के चुनाव जीतने से वह जरूरतें भी पूरी हो जाएंगी। कौन-कौन सी समस्याएं हैं, यह पूछने पर महाराज कहते हैं कि सड़कों को लेकर तो समस्याएं बनी ही रहती हैं। वह पूछते हैं कि आप बुधनी से कहां जाने वाले हैं। जब उन्हें यह बताया कि वह यहां से इसी विधानसभा क्षेत्र में एक और नगर पंचायत है नसरुल्लागंज, वहां जा रहे हैं, तो वह कहते हैं जब आप वहां जाएंगे तो अंदाजा हो जाएगा कि यहां की सड़कें कैसी हैं। तकरीबन 50 किलोमीटर की दूरी के लिए आपको डेढ़ घंटे से ज्यादा का वक्त लगेगा। सड़कों की स्थिति उतनी अच्छी नहीं है, जितनी एक मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में उम्मीद की जाती है।
इसी विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले मोहन यादव सड़क के किनारे होटल चलाते हैं। यह पूछने पर कि किसका जोर चल रहा है, तो वह सीधे कहते हैं कि यह मामा का इलाका है यहां और दूसरा तो कोई लड़ाई में भी नहीं है। किस मुद्दे के आधार पर इस विधानसभा में वोट डाले जाएंगे, इस सवाल पर मोहन यादव कहते हैं कि उनके विधायक ही मुख्यमंत्री हैं, तो निश्चित तौर पर सबसे गर्व की बात यही है और इसी आधार पर यहां की जनता शिवराज को वोट देती है। हालांकि मोहन यादव को इस बात का मलाल है कि भारतीय जनता पार्टी ने इस विधानसभा चुनाव में खुलकर मुख्यमंत्री का चेहरा शिवराज चौहान को नहीं घोषित किया है। इसी बात को लेकर उनकी विधानसभा क्षेत्र के लोगों में पार्टी के प्रति नाराजगी भी बनी है। मोहन के होटल पर काम करने वाले ओमकार सिंह कहते हैं कि जिस तरीके से शिवराज सिंह चौहान को लेकर पार्टी में अंदरूनी सियासत हुई, उसका संदेश बहुत अच्छा तो नहीं गया है। वह समूचे मध्यप्रदेश की बात तो नहीं करते हैं, लेकिन उनका कहना है कि यहां पर तो भारतीय जनता पार्टी का कोई विकल्प ही नहीं है।
सड़कों की समस्याओं से लेकर औद्योगीकरण पर भी लोग अपनी राय जाहिर करते हैं। बुधनी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली नगर पंचायत नसरुल्लागंज के अरुण माली कहते हैं कि अगर यहां पर कुछ और उद्योग लग जाते, तो शायद स्थानीय लोगों को रोजगार के लिए बड़े शहरों की ओर रुख न करना पड़ता। फूलों की माला बनाते हुए अरुण कहते हैं कि पहले बीस रुपये में मुट्ठी भर-भर के फूल दे दिया करते थे। लेकिन अब महंगाई इतनी है कि गिनकर फूल देने पड़ते हैं। उनका कहना है कि ऐसी महंगाई पर लगाम लगाने की बहुत जरूरत है। स्थानीय समस्याओं में वह सड़क की बदहाली पर नाराजगी जताते हैं। उनका कहना है कि अगर 50 किलोमीटर जाना हो, तो लोगों को दिन का बड़ा हिस्सा उसी में खर्च करना पड़ता है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की टक्कर में कौन है यहां पर, यह पूछे जाने पर अरुण हंसते हुए कहते हैं कि यह तो दूसरी पार्टी के नेता भी जानते हैं कि इस विधानसभा क्षेत्र में क्या परिणाम आने वाले हैं। इसलिए बड़े विपक्ष की यहां कोई बात ही नहीं करता है।
नसरूल्लागंज के रहने वाले अनवर सड़क पर दुकान लगाते हैं। वह कहते हैं कि अभी तो चुनाव में समय है। सब मिलकर तय करेंगे कि वोट किसे किया जाए। हालांकि अपनी समस्या बताते हुए अनवर कहते हैं कि सड़क के किनारे दुकान लगाते हैं और यह अस्थाई है। उनके जैसे तमाम पटरी दुकानदार लगातार मांग करते आए हैं कि उनका कोई ऐसा ठिकाना दे दिया जाए, जहां उनको पुलिस और नगर पंचायत की ओर से बार-बार हटाया ना जाए। रोज कमाने खाने वालों में शामिल अनवर की सबसे बड़ी समस्या यही है कि उनको पुलिस वाले आकर हटा देते हैं और फिर उनकी दिनभर की रोजी-रोटी चौपट हो जाती है। इसी जगह पर दुकान लगाने वाले कलीम कहते हैं कि उनके विधायक मुख्यमंत्री भी हैं, इसलिए यहां उनको सहूलियतें तो बहुत ज्यादा मिल जाती हैं। फिर भी वह उम्मीद करते हैं अगर इस इलाके में कुछ और उद्योग लग जाते तो स्थानीय लोगों को रोजगार में आसानी हो जाती।
बुधनी की रहने वाली जानकी बताती है कि यहां तो मामा ही चुनाव जीतने वाले हैं। उनका कहना है कि लाडली बहना योजना से उनको अब थोड़े बहुत खर्च चलाने भर की सम्मान राशि तो मिल ही जाती है। इसके अलावा उनका तर्क है कि मध्यप्रदेश में कानून व्यवस्था इतनी बेहतर है कि आप रात-बेरात कभी भी कहीं भी आ जा सकते हैं। बुधनी में शिवराज चौहान के खिलाफ और कौन से प्रत्याशी हैं, इस पर जानकी का कहना है कि उन्होंने तो कभी जानने की कोशिश ही नहीं की। लेकिन वह कहती हैं कि दूसरी बड़ी पार्टी कांग्रेस है, तो कांग्रेस का ही कोई प्रत्याशी लड़ रहा होगा, लेकिन उनको उस प्रत्याशी का नाम तक नहीं पता है। हालांकि स्थानीय निवासी शंकर तोमर कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी के 18 साल की सरकार के बाद अब बदलाव तो होना ही चाहिए। उदाहरण देकर कहते हैं कि जैसे केंद्र में कांग्रेस की सरकार बदली और भाजपा की सरकार आई, तो कितना बदलाव देखने को मिल रहा है। इसी तरह मध्यप्रदेश में भी अब एक बार बदलाव तो होना ही चाहिए ताकि दूसरी सरकारों की कार्यशैली का अंदाजा भी तो मिल सके।