स्थानीय सियासी जानकारों का मानना है कि वैसे तो इस इलाके में कमलनाथ की सियासी पकड़ बहुत मजबूत है, लेकिन यह बात बिल्कुल तय है कि कुछ सीटों पर प्रत्याशियों की देरी से घोषणा और कुछ सीटों पर प्रत्याशियों के चयन से स्थितियां कमजोर सी दिख रही हैं। राजनीतिक जानकार अशोक सिंह कहते हैं कि हालांकि यह चुनाव से पहले के ही अपने आंकलन हैं। असलियत तो परिणाम ही बताते हैं कि कौन कमजोर रहा और कौन मजबूत। लेकिन वह बताते हैं कि कुछ सीटों पर कांग्रेस ने प्रत्याशियों के चयन में देरी हुई है। इसमें आदिवासी बाहुल्य अमरवाड़ा की सीट भी शामिल है। इसलिए यह कहना कि छिंदवाड़ा की सभी सातों सीटें इस बार कांग्रेस के लिए उतनी ही आसान है जितनी पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान थी, थोड़ा कठिन है।