मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में 2008 से लेकर 2018 तक भाजपा ने शिवराज के चेहरे पर चुनाव लड़ा है। पहले दो चुनाव में सफलता मिली, लेकिन तीसरे चुनाव में पार्टी सरकार बनाने से चूक गई। इसको लेकर पार्टी के अंदर बात उठी की शिवराज के चेहरे से मतदाताओं को ऊब हो गई है। इसी फीडबैक के आधार पर पार्टी ने 2023 की रणनीति तैयार की। इसके बाद शिवराज सिंह चौहान के चेहरे को पीछे किया गया। सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भोपाल में कार्यकर्ता महाकुंभ में अपने भाषण में न तो शिवराज सिंह चौहान का नाम लिया, न ही उनकी लाडली बहना समेत दूसरी योजना का जिक्र किया। इससे संदेश गया कि पार्टी शिवराज को साइड लाइन कर रही है।
इसके बाद भाजपा ने अपने प्रत्याशियों की सूची में सात सांसदों समेत तीन केंद्रीय मंत्रियों को चुनाव मैदान में उतार दिया। शिवराज के समानांतर नेताओं को प्रत्याशी बनाने से कार्यकर्ताओं में संदेश गया कि उनके नेता भी मुख्यमंत्री बन सकते हैं। इससे नाराज कार्यकर्ताओं को मैदान में सक्रिय किया गया। फिर चर्चा शुरू हुई कि अब शिवराज सिंह चौहान को चुनाव नहीं लड़ाया जाएगा।
सीएम शिवराज खुद अपनी सभाओं में जनता को भावनात्मक रूप से जोड़ने के लिए कहने लगे कि मामा चला जाएगा तो बहुत याद आएगा। उन्होंने पूछना शुरू किया कि मैं चुनाव लड़ू या नहीं लड़ू। मुख्यमंत्री बनना चाहिए या नहीं। फिर भाजपा की चौथी सूची में शिवराज सिंह चौहान का नाम आया। अब फिर चुनाव में उनका नाम गिनाया जा रहा है।
यह है शिवराज का कद बढ़ने की वजह
जैसे ही चुनाव आगे बढ़ा और पार्टी के पास ग्राउंड स्तर से फीडबैक आने लगा। इसके बाद पार्टी ने यह महसूस हुआ कि शिवराज सिंह चौहान और उनकी योजनाएं को दरकिनार करने का भाजपा को नुकसान हो सकता है। इसलिए प्रधानमंत्री ने अपनी रैली में ना सिर्फ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का नाम लेना शुरू किया बल्कि लाडली बहना योजना को जिक्र करना भी शुरू किया। पार्टी सूत्रों के मुताबिक विधानसभा चुनाव में भाजपा को सबसे ज्यादा उम्मीद लाडली बहना योजना से ही है।
जनता से है मामा का खास जुड़ाव
शिवराज सिंह चौहान लगातार सभाएं कर रहे हैं। उनमें अपने भाषण से जनता को साधने की क्षमताएं है। वह जनता की भावनाओं से जोड़कर बात करते हैं। जनता को शिवराज अपने समान लगते हैं। वह उनके साथ बैठ जाते हैं। उनके साथ खाना खाने लगते हैं। गरीबों के दर्द को समझते हैं। यह शिवराज की खासियत है। यहीं वजह है कि पार्टी अब शिवराज के चेहरे की साख को भुनाने का प्रयास कर रही है।
पार्टी का शिवराज को फ्री हैंड
शिवराज अपने क्षेत्र को छोड़कर भाजपा को जिताने के लिए दूसरी विधानसभा में प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने दिवाली और धनतेरस के दिन तक सभाएं की है। पार्टी ने उनको फ्री हैंड दे दिया है। अभी चुनावी अभियान की कमान उन्होंने पूरी तरह से अपने हाथ में ले रखी है।
चुनाव हारे या जीते शिवराज ही होंगे फैक्टर
मध्य प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार प्रभु पटेरिया का कहना है कि भले ही मध्य प्रदेश के मन में मोदी के नारे के साथ भाजपा चुनावी मैदान में उतरी और बड़े नेताओं को प्रत्याशी बनाया। इसके बावजूद यह चुनाव शिवराज सिंह चौहान पर केंद्रित है। शिवराज सिंह चौहान की सक्रियता और उनकी लाडली बहना जैसी योजना भाजपा को फायदा पहुंचाती दिख रही है। यहीं वजह है कि पार्टी अब शिवराज के चेहरे की साख को भुनाने का प्रयास कर रही है। भाजपा जीते या हारे दोनों स्थिति में फैक्टर शिवराज होंगे।