उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला की कहानी।
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मध्यप्रदेश में भाजपा ने मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाया है। वहीं, राजेंद्र शुक्ला और जगदीश देवड़ा को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। प्रदेश नए डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला विध्ंय क्षेत्र में आने वाले रीवा जिले के रहने वाले हैं। विध्ंय क्षेत्र में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। राजेंद्र छात्र जीवन से राजनीति में सक्रिय हैं। जब-जब वे चुनाव जीते उन्हें शिवराज सरकार में मंत्री बनाया गया। 2018 में सत्ता विरोधी लहर में राजेंद्र कांग्रेस उम्मीदवार अभय मिश्रा को 18,089 वोटों से हराया था।
डिप्टी सीएम बनाए गए राजेंद्र शुक्ला 1986 में छात्र संघ अध्यक्ष बने थे। 1998 में उन्होंने रीवा से भाजपा के टिकट पर पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार पुष्पराज सिंह से करीब 1400 वोटों से हार गए। 2003 के चुनाव में उन्होंने पुष्पराज से इस हार का बदला लिया और पहली बार विधायक बनकर विधानसभा पहुंचे।
राजेंद्र शुक्ला रीवा से अब तक पांच बार चुनाव जीतकर विधायक बने हैं। सबसे पहले उन्हें उमा भारती की सरकार में पर्यावरण राज्य मंत्री का सवतंत्र प्रभार सौंपा गया था। 2008 और 2013 में चुनाव जीतकर विधायक बने तो शिवराज सरकार जैव विविधता/जैव प्रौद्योगिकी और खनिज संसाधन समेत अन्य मंत्रालयों के अधीन कार्य किया। 2018 में भाजपा के खिलाफ चल रही सत्ता विरोधी लहर में भी राजेंद्र शुक्ला ने कमल खिलाया। 26 अगस्त 2023 को शिवराज सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री के पद से नवाजा गया।
शुक्ला को डिप्टी सीएम बनाकर विंध्य और ब्राह्मण समाज को साधा
राजेंद्र शुक्ला का नाम मुख्यमंत्री या डिप्टी सीएम की रेस में शामिल नहीं था। भाजपा ने उनके नाम का एलान कर सबको चौंका दिया। लेकिन, भाजपा को इस फैसले का 2024 के लोकसभा चुनाव में फायदा मिलेगा, इसी बात को ध्यान में रखकर ये निर्णय किया गया है। राजेंद्र को डिप्टी सीएम बनाकर भाजपा ने विंध्य को साध लिया है, वहीं ब्राह्मण समाज पर भी अपनी पकड़ मजबूत की है।