मध्यप्रदेश के सतना जिला अस्पताल की ओपीडी में एक महिला अपनी बुखार से पीड़ित बच्ची को लेकर अस्पताल पहुंची थी। वह पर्ची बनवाने के लिए डेढ़ घंटे तक लाइन में खड़ी रही। अस्पताल में 400 मरीजों और परिजनों की भीड़ थी। इसी बीच बच्ची की हालत बिगड़ गई और उसने मां की गोद में ही दम तोड़ दिया।
सिविल लाइन थाना क्षेत्र की खाम्हाखूजा गांव निवासी रीना शुक्ला अपनी बच्ची का इलाज करवाने के लिए जिला अस्पताल आई थी। वह सुबह नौ से साढ़े दस बजे तक लाइन में खड़ी रही लेकिन भीड़ ज्यादा होने की वजह से उसका नंबर नहीं आ पाया। इसी बीच
गोद में लेटी हुई बच्ची की हालत गंभीर हो गई और उसने दम तोड़ दिया। उसकी मां को इसका अहसास तक नहीं हुआ। थोड़ी देर बाद जब उसने बच्ची को हिलाया-डुलाया तो उसने कोई हरकत नहीं की।
महिला डॉक्टर से मिलने के लिए इधर-उधर भागती रही। जिसके बाद वहां मौजूद कुछ युवक उसे
शिशु रोग विशेषज्ञ के डॉक्टर सुनील कारखुर के पास लेकर पहुंचे। डॉक्टर कारखुर बच्ची को इमरजेंसी वार्ड में ले गए लेकिन तब तक मासूम दम तोड़ चुकी थी। रीना ने बताया कि उसके पति इस समय किसी मामले में जेल में बंद हैं। घर में कोई और सदस्य नहीं हैं। इसी वजह से वह बच्ची को लेकर तुरंत अस्पताल लेकर नहीं आ सकी।
रीना ने आरोप लगाते हुए कहा कि अगर जिला अस्पताल में अव्यवस्थाएं नहीं होतीं तो उसकी बच्ची की जान नहीं जाती। उसने बताया कि पर्ची बनवाने के लिए आठ काउंटर हैं। जिसमें चार पुरुषों के तो चार महिलाओं के हैं। हालांकि सोमवार को महिला और पुरुष एक ही लाइन में खड़े थे। जिसकी वजह से उसे पर्ची बनवाने में ही ज्यादा समय लग गया।