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राज्यपाल के खिलाफ कार्रवाई पर उलझी सरकार

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व्यापम घोटाला मामले में बुरी तरह उलझे मध्यप्रदेश के राज्यपाल रामनरेश यादव को पद से हटाने के मामले में खुद केंद्र सरकार बुरी तरह उलझ गई है।
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सरकार के रणनीतिकारों को डर है कि यादव को पद से हटाने की स्थिति में राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी पद से हटाने का सियासी दबाव बढ़ सकता है।

यही कारण है कि यादव के खिलाफ कार्रवाई का खाका तैयार होने के बावजूद इस पर अब तक अमल नहीं हो पाया है। हालांकि सरकार में एक वर्ग राज्यपाल पर तत्काल कार्रवाई के पक्ष में है।
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इनका तर्क है कि चूंकि इस मामले की जांच करने वाले एसटीएफ ने इस घोटाले में यादव की भूमिका को संदिग्ध मानते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज किया था, इसलिए सरकार यादव को हटा कर इस मामले में किसी को नहीं बख्शने का सियासी संदेश दे सकती है।
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राज्यपाल को चलता किए जाने के पक्ष में पीएम मोदी

इस वर्ग का यह भी कहना है चूंकि शिवराज एसटीएफ के जांच के दायरे में नहीं थे और फिलहाल सीबीआई जांच शुरू हुई है, इसलिए राज्यपाल को हटाने की स्थिति में विपक्ष के दबाव से पार पाया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस घोटाले की जांच सीबीआई के सुपुर्द करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पार्टी के वरिष्ठ मंत्रियों और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा कर चुके हैं।

सरकार के एक मंत्री के मुताबिक पीएम मोदी मध्यप्रदेश के राज्यपाल को चलता किए जाने के पक्ष में हैं। फिलहाल सरकार राज्यपाल के खिलाफ कोई निर्णय लेने से पहले 20 जुलाई को सर्वदलीय बैठक और इसके बाद शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में विपक्ष का मूड भांप सकती है।

उक्त मंत्री के मुताबिक व्यापमं घोटाला मामले में बचाव की रणनीति पर हुई अब तक की चर्चा में मानसून सत्र में विपक्ष के दबाव में न झुकने की रणनीति बनी है।
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