फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

मिशन 2023: आंबेडकर की जन्मस्थली से निकलेगा जीत का रास्ता, भाजपा-कांग्रेस का फोकस दलित वोट बैंक पर

राहुल संपाल
Updated Fri, 15 Apr 2022 04:19 PM IST

सार

बीजेपी के एक प्रदेश उपाध्यक्ष ने अमर उजाला से चर्चा में कहा कि 14 अप्रैल को आंबेडकर जयंती है। इस दिन को नजर में रखते हुए बीजेपी ने दलित वोटबैंक में पैठ बनाने की कोशिश शुरू कर दी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
कमलनाथ-शिवराज सिंह चौहान (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook


कोरोना महामारी की बंदिशे खत्म होने के दो साल साल भाजपा और कांग्रेस दोनों को संविधान निर्माता डॉ. बाबा साहब भीमराव आंबेडकर की याद आ गई है। 2023 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए एक विशेष वर्ग में पैठ बढ़ाने के लिए दोनों दल आंबेडकर की जयंती धूमधाम से मनाने में जुटे हुए है। प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार 14 अप्रैल अंबेडकर जयंती पर तीन दिवसीय महोत्सव कर रही है। इसमें सीएम के साथ ही प्रदेश और केंद्र सरकार के मंत्री शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में करीब पांच लाख से ज्यादा अंबेडकर के अनुयायी शामिल होंगे। सरकार ने सभी के रहने से लेकर खाने और आने जाने की व्यवस्था की है। जबकि विदेश आने वाले अनुयायियों का स्वागत की जिम्मेदारी भाजपा कार्यकर्ताओं को सौंपी गई है।




बीजेपी के एक प्रदेश उपाध्यक्ष ने अमर उजाला से चर्चा में कहा कि 14 अप्रैल को आंबेडकर जयंती को नजर में रखते हुए बीजेपी ने दलित वोटबैंक में पैठ बनाने की कोशिश शुरू कर दी है। इसलिए शहरों और गांवों में जो छोटे लेवल से लेकर बड़े लेवल तक कार्यक्रम किए गए। भाजपा ने प्रदेशभर के 65 हजार बूथों पर कार्यक्रम किया। खुद प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा ने सभी बूथों को अंबेडकर जयंती से जुड़े जरूरी दिशा निर्देश दिए थे। उनके मार्गदर्शन में बीजेपी ने सभी बूथों पर आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी।


शिवराज को घेरेंगे नाथ और सिंह

इधर, विरोधी दल कांग्रेस भी इस मौके को भुनाने में पीछे नहीं रहना चाहती। यही वजह है कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व सीएम कमलनाथ और दिग्विजय सिंह जैसे दिग्गज नेता 14 अप्रैल को महू पहुंचे और आंबेडकर स्मारक पर श्रद्धासुमन अर्पित किया। हालांकि, उससे पहले कांग्रेस ने आंबेडकर को अपनी पार्टी का नेता बताने के लिए प्रचार प्रसार भी शुरू कर दिया है। आंबेडकर जयंती के समारोह में कांग्रेस नेता कमलनाथ दूसरी बार पहुंचे। कमलनाथ का यह दौरा उस पत्र के ठीक बाद हुआ, जो उन्होंने आंबेडकर स्मारक समिति में अनियमितता के मामले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लिखा है।




दरअसल, आंबेडकर स्मारक समिति का कामकाज विवादों में रहा है। इसकी वजह समिति के पूर्व पदाधिकारी और अब तक जन्म स्मारक का चेहरा बने रहे मोहन राव वाकोड़े हैं। जिन्होंने समिति की मौजूदा कार्यकारिणी पर कई तरह के आरोप लगाए हैं। इस मामले में पिछले दिनों मोहन राव वाकोड़े ने कमलनाथ से मिलकर हस्तक्षेप की अपील की थी। इसके बाद कमलनाथ ने सीएम शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा था।
विज्ञापन


उन्होंने अपने पत्र में कहा था कि समिति के अध्यक्ष भंते संघशील की मृत्यु के बाद समिति में अनियमितताएं शुरु हुईं और गलत तरीके से सदस्य बढ़ाए गए। समिति पर लगातार आरोप लग रहे हैं और समिति से संबंधित रहे समाज के लोगों के मुताबिक स्मारक समिति में वित्तीय अनियमितताएं भी हो रहीं हैं और इससे समाज की भावनाएं आहत हो रहीं हैं। 


कमलनाथ ने मुख्यमंत्री को लिखा है कि उनके द्वारा पहले भी मुख्यमंत्री तक इस मामले की जानकारी दी गई है लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले हैं। स्मारक समिति के कामकाज में पारदर्शिता होना जरूरी है और इस परिसर का उपयोग गैर राजनीतिक स्थान के रूप में किया जाना चाहिए ताकि बाबा साहेब आंबेडकर में आस्था रखने वाले लोगों की आस्था आहत न हों।


ये है समीकरण

  • मध्यप्रदेश में 230 विधानसभा सीटों में 35 सींटें एससी वर्ग के लिए आरक्षित हैं। 2018 के चुनाव में बीजेपी को 7 सीटों का नुकसान हुआ था। उसे 21 सीटें मिलीं थीं।2013 में उसके पास 28 एससी विधायक थे।
  • बीजेपी 2023 में फिर से 2013 का इतिहास दोहराना चाहती है। इसलिए बीजेपी रविदास जयंती के बाद अंबेडकर जयंती का आयोजन कर एससी हितैषी बनने के प्रयास में लगी हुई है।
  • इधर, कांग्रेस ने भी इन आरक्षित सीटों पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। वह बीजेपी सरकार को एससी विरोधी बता रही है। कह रही है बीजेपी ने एससी वर्ग के लिए आज तक कुछ नहीं किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next