बदलते दौर के साथ व्यक्तियों की सोच, व्यव्हार, तौर तरीका सब बदलता जा रहा है। इसी के साथ जब बात आती है रिश्तों की तो इस पर खास ध्यान देने की आवश्यकता है। यदि बात करें माता-पिता और बच्चों के एक दूसरे के साथ रिश्तों की तो कई ऐसे कारण हैं जिनसे उनके बीच दूरियां बढ़ जाती हैं जिसका सबसे बड़ा कारण है सोच में अंतर।
जिसके चलते बच्चे नादानी में माता- पिता द्वारा लिए निर्णयों को गलत समझ लेते हैं और बच्चे गंभीर कदम उठा लेते हैं। इंदौर में सोमवर को तेजपुर स्थित आईडीए मल्टी में रहने वाले 17 वर्षीय नाबालिग लड़की ने घर में फांसी लगा ली।
उसने एक सुसाइड नोट अपने मात- पिता के नाम लिखा है। गुस्से में उसने पिता के लिए लिखा कि वह शव को हाथ तक नहीं लगाएं, क्योंकि वह उनकी रोज-रोज की बातों से परेशान हो गई थी। आत्महत्या के पीछे का मुख्य कारण प्रेम संबंध बताया जा रहा है।
जांच अधिकारी अशरफ अली अंसारी के अनुसार, लड़की अपने पिता से नाराज थी। जानकारी के मुताबिक नाबालिग का मोहल्ले के किसी लड़के के साथ प्रेम संबंध थे। इसकी जानकारी पिता को लग गई थी। वह उसे बार-बार लड़के से नहीं मिलने का कहकर रोकने-टोकने लगे थे।
इसी कारण नाबालिग ने ये कदम उठाया। सोमवार को माता-पिता काम से घर के बाहर थे। पिता लौटे तो दरवाजा नहीं खुला। उन्होंने दरवाजा तोड़ा तो वह फांसी के फंदे पर मिली। बता दें कि नाबालिग घरों में साफ सफाई का काम किया करती थी।
जांच अधिकारी के मुताबिक, संजना ने सुसाइड नोट में लिखा है कि मम्मी मैं जा रही हूं। रोज-रोज की बातें नहीं सुन सकती। उस बलिराम को कह देना कि वह मेरे पास भी नहीं आए। न ही मेरे शव को हाथ लगाए। मैंने सिड (युवक का नाम) से बात करना छोड़ दिया है।
सॉरी मम्मी, मैं मर्जी से सुसाइड कर रही हूं। जांच अधिकारी के मुताबिक, संजना ने सुसाइड नोट में लिखा है कि मम्मी मैं जा रही हूं। रोज-रोज की बातें नहीं सुन सकती। उस बलिराम को कह देना कि वह मेरे पास भी नहीं आए। न ही मेरे शव को हाथ लगाए। मैंने सिड (युवक का नाम) से बात करना छोड़ दिया है। सॉरी मम्मी, मैं मर्जी से सुसाइड कर रही हूं।