देर रात छात्रा ने थाने पर दर्ज करवाई एफआईआर।
- फोटो : अमर उजाला
मंदसौर जिले के पिपलियामंडी में सोमवार को नगर परिषद के सभापति और उसके साथी ने मिलकर कॉलेज की एक छात्रा का अपहरण कर लिया। इस दौरान छात्रा के साथ मारपीट की गई और उसके चरित्र पर भी सवाल उठाए गए। हालांकि छात्रा की हिम्मत और समय रहते पुलिस की कार्रवाई के कारण उसे सुरक्षित छुड़ा लिया गया। देर रात पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया।
कैसे हुई वारदात
वायडी नगर पुलिस के अनुसार पीड़िता परिवर्तित नाम (काजल) ने शिकायत में बताया कि वह कॉलेज में पढ़ाई करती है। 15 सितंबर को दोपहर करीब 2:30 बजे जब वह कॉलेज से बाहर निकली, तभी एक काली रंग की बिना नंबर की कार उसके पास आकर रुकी। कार में सवार अभिषेक (निवासी पिपलियामंडी) उससे जबरन बात करने लगा। विरोध करने पर अभिषेक ने उसका हाथ पकड़ लिया, थप्पड़ मारे, बाल खींचे और जबरन कार में बैठा लिया। इस दौरान उसने मोबाइल भी छीन लिया और हाथ-पैर तोड़ने की धमकी दी।
कार को श्रवण चौहान चला रहा था, जो कि भाजपा नेता और पिपलियामंडी नगर परिषद का सभापति है। पीड़िता ने श्रवण से गाड़ी रोकने को कहा, लेकिन उसने गाड़ी नहीं रोकी। कृषि मंडी के पास डायल-112 की गाड़ी खड़ी देखकर छात्रा ने जोर से शोर मचाया। इस पर पुलिस ने कार रुकवाई और सभी को थाने ले आई।
चार साल से जान-पहचान
पुलिस ने बताया कि काजल और अभिषेक पिछले चार साल से एक-दूसरे को जानते थे। काजल के पिता ने ही कभी अभिषेक को कहा था कि वह काजल का ध्यान रखे। बाद में अभिषेक को शक हुआ कि काजल का किसी और से संबंध है। इसी कारण उसने सभापति श्रवण चौहान के साथ मिलकर यह साजिश रची।
ये भी पढ़ें- ट्रक हादसे के घायलों से मिले सीएम, कड़ी जांच का आश्वासन दिया
थाने पर हंगामा और एफआईआर
थाने पर दोनों परिवारों में बहस हुई, लेकिन पुलिस ने समझौता करवा दिया। इसके बाद सभी घर लौट गए। बाद में छात्रा अपने पिता के साथ रात करीब 11:30 बजे थाने पहुंची और आरोपियों के खिलाफ अपहरण और मारपीट का केस दर्ज कराया। वायडी नगर थाना प्रभारी संदीप मंगोलिया ने बताया कि दोनों आरोपियों के खिलाफ धारा 115(2), 140(3) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल दोनों की तलाश जारी है।
घटना के बाद राजनीति गरमाई
इस अपहरण कांड में नगर परिषद सभापति के शामिल होने से मामला राजनीतिक रंग ले बैठा। थाने पर पीड़िता पक्ष के समर्थन में भीड़ जुट गई। वहीं आरोपी पक्ष के लोग समझौते की कोशिश करते रहे। सोशल मीडिया पर भी लोग इसे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से जोड़कर देख रहे हैं।