मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
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क्रिश्चियन मिशनरीज से जुड़ी आर्कडायसिस का रजिस्ट्रेशन तो भारतीय कानूनों के अनुसार हुआ है, पर इनमें अध्यक्षों की नियुक्ति वेटिकन सिटी यानी सीधे पोप के हाथों होती है। इसे ही मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
भोपाल के कैथोलिक पादरी- फादर आनंद मुटुंगल ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में दो याचिका दाखिल की थी। इसमें उन्होंने कहा था कि आर्कडायसिस का रजिस्ट्रेशन फर्म्स एंड सोसायटी एक्ट के तहत हुआ है। इसके बाद भी अध्यक्ष एवं अन्य पदों पर नियुक्तियां सीधे वेटिकन सिटी से होती है। कानून साफ कहता है कि सोसायटी के अध्यक्ष एवं पदाधिकारियों का चुनाव होना चाहिए या सदस्यों की ओर सर्वसम्मति से नाम आगे आने चाहिए। जब इस संस्था का रजिस्ट्रेशन भारतीय कानून से हुआ है तो भारत के संवैधानिक नियमों का पालन होना चाहिए। इसके अनुसार अध्यक्ष व अन्य पदाधिकारियों की नियुक्ति होनी चाहिए।
हाईकोर्ट ने दी याचिका वापस लेने की अनुमति
याचिका पर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ और जस्टिस पुरुषेंद्र कौरव ने पाया कि याचिकाकर्ता इस संस्था का सदस्य नहीं है। इस वजह से वह संस्था के नियमों या नियुक्तियों को चुनौती नहीं दे सकता। इस पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता के याचिका वापस लेने के आग्रह को स्वीकार कर लिया और यह याचिका खारिज हो गई।