बताया जा रहा है कि जनवरी माह के अंत में लापता और अपहृत लड़कियों के कुल 3,122 मामले लंबित थे। ऐसे में अभियान को जनवरी में शुरू किया गया और इसके तहत 2,444 लापता और अपहृत लड़कियों को मध्यप्रदेश और प्रदेश के बाहर से बचाया गया। अधिकारी ने कहा कि इसमें इंदौर की 175 बालिकाएं, सागर की 144, धार की 115, रीवा की 107 एवं छतरपुर की 102 बालिकाओं को उनके परिजनों के सुपुर्द किया गया।
उन्होंने बताया कि अभियान के तहत करीब 82 फीसदी लापता या अपहृत लड़कियां प्रदेश में ही मिल गईं जबकि बाकी अन्य राज्यों में मिलीं। अधिकारी के अनुसार, ‘‘पंजाब से 141, तेलंगाना से आठ, केरल से छह, जम्मू-कश्मीर से पांच, पश्चिम बंगाल से चार, कर्नाटक से तीन-तीन लड़कियों को बचाया गया। जबकि असम और केंद्र शासित क्षेत्र दमन से एक-एक लड़की को बचाया गया।
उन्होंने कहा कि कार्रवाई के दौरान कुछ लड़कियां गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भी मिलीं। अधिकारी ने कहा कि अपहरण के प्रत्येक मामले में कार्रवाई की प्रगति की हर तीन दिन में समीक्षा की जाती है। गौरतलब है कि पिछले माह एक बैठक में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि वह अपहृत बच्चों के माता-पिता को ऐसे मामलों की प्रगति और जांच की स्थिति के बारे में सूचित करें।
चौहान ने कहा था कि अपहृत बच्चों के माता-पिता को एक 'अधिकार पात्र' (प्राधिकरण पत्र) मिलेगा, जिसमें बच्चों का पता लगाने की दिशा में पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के बारे में जानकारी होगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि मार्च 2020 के बाद से मध्यप्रदेश में महिलाओं के खिलाफ विभिन्न अपराधों में 15 से 50 प्रतिशत की कमी आई है।