कार्तिक-अगहन माह में प्रतिवर्ष महाकालेश्वर भगवान की चार सवारियां निकाली जाती है।
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भगवान महाकालेश्वर की कार्तिक-अगहन माह में निकलने वाली पहली सवारी सोमवार को निकली। महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में विधिवत पूजन के बाद सवारी आरंभ हुई जो अलग अलग मार्गों में पहुंची। कोविड प्रोटोकॉल के चलते इस बार सवारी मार्ग का स्वरूप सीमित किया गया।
कार्तिक-अगहन माह में प्रतिवर्ष महाकालेश्वर भगवान की चार सवारियां निकाली जाती है। पहली सवारी सोमवार को निकली और इसी माह के आगामी सोमवार को बाकी की सवारियां निकाली जाएगी। 17 नवंबर को हरि-हर मिलन होगा और आकर्षक सवारी निकलेगी। सोमवार को शाम 4 बजे भगवान के चंद्रमौलेश्वर स्वरूप का पूजन किया गया। इसके बाद पुजारी, प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी ने पालकी को कंधे पर उठाकर सवारी की शुरुआत की।
दर्शन के लिए लोग दिखे लालायित
महाकालेश्वर मंदिर से शुरू होकर सवारी बड़ा गणपति मंदिर के सामने पहुंची। यहां से हरसिद्धि मंदिर के पीछे नरसिंह घाट रोड से होते हुए रामघाट पहुंची। शिप्रा जल से अभिषेक किया गया। इसके बाद रामानुजकोट, हरसिद्धि पाल से मंदिर के सामने होते हुए वापस महाकालेश्वर मंदिर पहुंची। सवारी के दर्शन के लिए लोग लालायित दिखे। पलक पावड़े बिछाकर लोग भगवान महाकाल के दर्शन करना चाहते थे।