मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भारतीय वन सेवा के तत्कालीन अपर प्रधान मुख्य वन सरंक्षक व पदेन वन संरक्षक मोहन मीणा द्वारा की गई आर्थिक अनियमितताओं व अन्य आरोपों को लेकर की गई शिकायत पर कार्रवाई न होने का आरोप लगाने वाले मामले को गंभीरता से लिया है। चीफ जस्टिस रवि विजय मलिमथ व जस्टिस मनिंदर सिंह भट्टी की युगलपीठ ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई पर भोपाल लोकायुक्त को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
सागर के मकरोनिया निवासी पत्रकार प्रदीप कुमार जैन की तरफ से जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कि मोहन मीणा भारतीय वन सेवा तत्कालीन अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं पदेन वन संरक्षक बैतूल के द्वारा अपने पदीय कर्तव्य के निर्वहन में कई आर्थिक अनियमितताएं की गई हैं।
याचिका के अनुसार आईएफएस मोहन मीणा द्वारा अपने क्षेत्र के वन भूमि पर संचालित शासकीय योजनाओं में कई प्रकार की आर्थिक अनियमितताओं के साथ ही बिना किसी अधिकारिता के अपने विभाग के कर्मचारियों का स्थानांतरण किया गया। उनके द्वारा बिना किसी अधिकार के अपने अधीनस्थ कर्मचारियों का निलंबन, विभागीय जांच कर उन कर्मचारियों से अवैधानिक तरीके से राशि की मांग की जाती थी, जिससे मोहन मीणा अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक बैतूल के विरुद्ध याचिकाकर्ता द्वारा लोकायुक्त भोपाल को कई शिकायतें की गई, लेकिन लोकायुक्त भोपाल द्वारा शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिस पर यह याचिका दायर की गई है।
मामले में फॉरेस्ट विभाग के सचिव, सीसीएफ भोपाल, कमिश्नर लोकायुक्त भोपाल व चीफ फॉरेस्ट रेंजर बैतूल को पक्षकार बनाया गया। मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने लोकायुक्त को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।