गांधी मेडिकल कॉलेज समेत प्रदेश के 6 मेडिकल कॉलेज में आईवीएफ सेंटर शुरू होंगे।
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सोमवार को चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने जानकारी दी कि प्रदेश के 6 मेडिकल कॉलेज में आईवीएफ सेंटर शुरू होंगे। इसमें भोपाल का गांधी मेडिकल कॉलेज भी शामिल है।
सारंग ने कहा कि मेडिकल कॉलेज में सभी तरह की स्पेशलाइजेशन सर्विसेस को लेकर आ रहे है। इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना बनाई है। आज आईवीएफ महत्वपूर्ण पहलू है। जल्द से जल्द मेडिकल कॉलेज में आईवीएफ यूनिट शुरू होगी। उन्होंने बताया कि सभी मेडिकल कॉलेजों में कैथ लैब भी स्थापित की जाएगी।
मेडिकल कॉलेज से मांगा प्रस्ताव
चिकित्सा शिक्षा विभाग ने भोपाल, जबलपुर, गवालियर, इंदौर, रीवा और सागर मेडिकल कॉलेज से आईवीएफ सेंटर खोलने के लिए प्रस्ताव मांगा है। यह सेंटर तीन महीने में खोलने की योजना है।
गरीब दंपती को होगा फायदा
मेडिकल कॉलेज में आईवीएफ सेंटर खोलने से कमजोर आय वर्ग के दंपतियों को फायदा होगा, जो निजी सेंटर का खर्च नहीं उठा सकते।
क्या है आईवीएफ तकनीक
इस तकनीक में एक परखनली में महिलाओं के एग और पुरुष के स्पर्म को का फर्टिलाइजेशन कराया जाता है। भ्रूण तैयार होने पर उसे महिला के गर्भाशय में प्रवेश कराया जाता है। जिसके बाद महिला गर्भधारण कर बच्चे को जनम देती है। यह तकनीक ऐसी महिलाओं के लिए बेहतर विकल्प है जिन दंपतियों पर दवा, सर्जरी ओर कृत्रिम गर्भाधान की विधियां काम नहीं करती है।
‘गजराराजा मेडिकल कॉलेज को नए कैंपस की सौगात’
चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने ट्वीट कर कहा कि ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज में पीजी सीट बढ़ाए जाने के लिए 60 करोड़ की लागत से नया कैंपस तैयार किया जाएगा। स्टूडेंट्स के लिए बरई में 30-30 बेड के दो हॉस्टल बनाए जाएंगे।