मध्यप्रदेश सरकार द्वारा पूरे राज्य में नगरपालिका और नगर निगमों की सीमाओं को घटाने-बढ़ाने की प्रक्रिया पर उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ द्वारा पार्षद दिलीप शर्मा और भारत पारख की याचिका पर सुनवाई के बाद, सरकार द्वारा कलेक्टरों को अधिकृत कर प्रारंभ की गई प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई है।
इसके बाद इंदौर में बांक और नैनोद को शामिल करने की प्रक्रिया रूक गई है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पीयूष माथुर, पुरुषेन्द्र कौरव व पुष्यमित्र भार्गव ने तर्क रखे थे। इस संबंध में सुनवाई की दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया था कि नगर निगम में गांवों को शामिल करने के लिए जो प्रक्रिया अपनाई गई है उसमें कोई गलती नहीं हुई है।
दूसरी ओर इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने कहा कि सरकार की ओर से नगर निगम सीमा को बढ़ाने के लिए जो प्रक्रिया अपनाई गई वो पूरी तरह से गलत है।
यह याचिका इंदौर नगर निगम में बांक और नैनोद को शामिल होने के मामले में लगाई गई थी। इससे पहले इंदौर नगर निगम में शहर के आस-पास स्थित 29 गांवों को शामिल किया गया था। इसके बाद शहर से लगे इन दो गांवों को निगम में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी।
इसके बाद ही पार्षद दिलीप शर्मा और भारत पारख ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में यह याचिका लगाई थी। दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसके बाद बुधवार को इस मामले में प्रदेश में सभी नगर निगम और नगरपालिका की सीमाओं को घटाने-बढ़ाने के लिए अपनाई जा रही प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई।