शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश
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मध्यप्रदेश में बीते कुछ दिनों से बारिश आफत बनकर बरस रही है। प्रदेश के छह जिलों में लगातार बारिश से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। यहां पर बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है। निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि राज्य के बाढ़ प्रभावित हिस्सों से अब तक 8,832 लोगों को बचाया गया है, जबकि 29,280 अन्य को इन क्षेत्रों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
इस बीच पार्वती नदी की बाढ़ के कारण गुना जिले के सुंडा गांव में फंसे कम से कम 145 लोगों को हेलिकॉप्टर व बोट की मदद से निकाला गया। राजस्थान के कोटा में अधिकारियों ने बताया कि मप्र सरकार ने हेलिकॉप्टर व बोट भेजी थी। निकाले गए लोगों को राजस्थान के बारां जिले के छबड़ा कस्बे में ले जाया गया। बारां के एसपी विनीत बंसल ने बताया कि सुंडा गांव के ये लोग शुक्रवार से बाढ़ से घिरे थे। गुना कलेक्टर व एसपी शुक्रवार रात से छबड़ा कस्बे में राहत व बचाव कार्यों के लिए डेरा डाले हुए थे। शनिवार को एनडीआरएफ व राजस्थान एसडीआरएफ की टीमों ने फंसे लोगों को निकाल लिया।
'अन्न उत्सव' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बारिश और बाढ़ पर जानकारी साझा की। बता दें कि मध्यप्रदेश में विदिशा, गुना, राजगढ़, सागर सहित अन्य जिलों में मूसलाधार बारिश होने से नदी नाले उफान पर हैं और कई मार्ग बंद किए गए हैं। जनजीवन पूरी तरह से अस्तव्यस्त है। ग्वालियर और चंबल संभाग में स्थिति बिगड़ी हुई है। यहां पर 24 लोगों की मौत हो चुकी है।
बचाव कार्यों में एयरफोर्स भी शामिल
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि शनिवार सुबह तीन जिलों में बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की है। शिवराज सिंह ने ट्वीट किया "आज सुबह गुना, अशोकनगर, विदिशा जिलों में बाढ़ की स्थिति और बचाव अभियान का जायजा लिया। गांवों में फंसे लोगों को निकालने के लिए एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें भी रात से काम कर रही हैं। भारतीय वायुसेना का बचाव अभियान सुबह से शुरू है। शनिवार सुबह 40 से ज्यादा लोगों को बचाया गया है।
कांग्रेस पर शिवराज सिंह का तंज
वहीं, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पर घटिया राजनीति करने का आरोप लगाया है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि वह बाढ़ में फंसे लोगों को बचाने में जुटे हुए हैं और कांग्रेस विपदा के समय भी राजनीति कर रही है, जब कमलनाथ मुख्यमंत्री थे तो उनके मंत्री एक -एक सप्ताह तक क्षेत्रों में नहीं जाते थे।