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मध्य प्रदेश: ग्रामीण क्षेत्रों से गायब हुई बिजली, सीएम के गृह जिले सीहोर के गांवों में 12 से 18 घंटे तक हो रही कटौती

Tue, 03 May 2022 05:02 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर

सार

मध्य प्रदेश में इन दिनों बिजली संकट गहराने की आशंका मंडरा रही है। कोयले का संकट इस आशंका को बल दे रहा है। इधर ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती शुरू हो गई है। सीएम के गृह जिले में तो हालात और भी बिगड़ने लगे हैं। सीहोर के गांवों में 12 से 18 घंटे तक की कटौती की जा रही है।
 
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सीहोर जिले के ग्रामीण इलाकों में अघोषित बिजली कटौती जारी है।
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विस्तार
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सीहोर जिले के ग्रामीण इलाकों में अघोषित बिजली कटौती जारी है। मुश्किल से चार-पांच घंटे ही बिजली मिल रही है। कटौती का समय निर्धारित नहीं है। अघोषित कटौती के कारण दिन भर में आधा-एक घंटा के लिए बिजली आती है। फिर दो-तीन घंटे के लिए कटौती की जाती है। इससे ग्रामीणों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो रहा है। कटौती का कोई समय भी निर्धारित नहीं है, जिससे लोगों के न तो मोबाइल चार्ज हो पा रहे हैं और न ही पानी भर पा रहे हैं।
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शहरी और ग्रामीण इलाकों के आबादी वाले क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली मुहैया कराए जाने और 15 मिनट से ज्यादा समय के लिए बिजली कटौती किए जाने से पहले उपभोक्ताओं को इसकी जानकारी मुहैया कराए जाने का प्रावधान है, लेकिन बिजली कंपनी के स्थानीय अधिकारियों के द्वारा कटौती से पहले उपभोक्ताओं को कोई जानकारी नहीं दी जाती है। वहीं हर रोज ग्रामीण क्षेत्रों में 12 से 18 घंटों तक कटौती की जा रही है। इससे लोगों को उमस भरी गर्मी में दिन और रात के समय परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्रवासी आए दिन बिजली कटौती से परेशान होकर हेल्पलाइन नंबरों से लेकर बिजली कंपनी के आला अफसरों को फोन पर शिकायत करते रहते हैं।

ग्राम बरखेड़ाहसन में इन दिनों 16 घंटे तक बिजली कटौती हो रही है। जिससे लोगों को कई तरह की परेशानी हो रही है। ग्रामीण शफीक खान, भूरा चंगेज, हेमराज लोधी और सुरेश लोधी ने बताया कि 24 घंटे में से 16 घंटे तक कटौती हो रही है। कटौती से खाना-पीना भी प्रभावित हो रहा है। बिजली रहती नहीं तो चक्की वाले समय पर गेहूं नहीं पीस पा रहे। पानी भी भरने में मशक्कत करना पड़ रही है।
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जिले के करीब 70 हजार हेक्टेयर जमीन पर मूंग की बोवनी की गई है। इस फसल की सिंचाई के लिए किसानों को बिजली नहीं मिल रही है। किसानों को फसल की सिंचाई के लिए जनरेटर का उपयोग करना पड़ रहा है। जिसमें एक हेक्टेयर में 7500 हजार रुपये से ज्यादा का डीजल तक खर्च हो रहा है। किसानों का कहना है कि फसल के लिए तो बिजली मिल ही नहीं रही और तो और घरों में भी बिजली नहीं मिलने से जनजीवन प्रभवित हो रहा है।

जिले के सैंकड़ों गांवों में यही स्थिति है। इछावर ब्लाक के अधिकतर गांवों में यही हाल हैं। नीलबड़ और दिवड़िया के किसानों ने बताया कि गांव में 12 से 16 घंटे तक बिजली कटौती की जा रही है। जिससे लोगों को परेशानी हो रही है। इसी तरह आष्टा के जावर क्षेत्र में सबसे ज्यादा बिजली कटौती हो रही है। बिजली कटौती के कारण लोगों को खासा परेशानी हो रही है। इसी तरह नसरुल्लागंज और बुदनी में भी कटौती की जा रही है।

इस संबंध में बिजली कंपनी के सहायक यंत्री शरद महोबिया का कहना है कि लोड शिफ्टिंग के कारण अधिकारियों से बिजली कटौती के निर्देश मिल रहे हैं। जिसके चलते बिजली कटौती की जा रही है। जल्द ही इस समस्या का समाधान करने का प्रयास किया जाएगा।
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