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मध्यप्रदेश चुनाव 2018: पन्ना की जनता नहीं देगी किसी भी पार्टी को वोट, दबाएगी नोटा का बटन

Thu, 08 Nov 2018 10:59 AM IST
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, पन्ना
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अमर उजाला चुनाव रथ पन्ना में - फोटो : Amar Ujala
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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए 28 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। अमर उजाला आपको बता रहा है मध्यप्रदेश के जमीनी हालात और उन विषयों के बारे में जो इस बार चुनावी मुद्दे हैं। इसी के मद्देनजर अमर उजाला का चुनाव रथ पहुंचा पन्ना। संवाददाता वैभव कुमार ने आम जनता और सियासी दलों से बात करके यहां मूड जानने की कोशिश की। 
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उन्होंने जाना कि आखिर जनता क्या चाहती है? उनके चुने हुए नेता उनकी उम्मीदों पर कितने खरे उतरे हैं? साथ ही यह भी जाना की जनता इस बार के चुनाव में किसे मौका देने का मन रखती है। टी वैली प्रायोजित अमर उजाला के खास लाइव कार्यक्रम सत्ता के सेमीफाइनल में जानिए कि पन्ना इस बार किन मुद्दों पर वोट करने वाला है। 

पन्ना की जनता में सरकार और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ गहरी निराशा है। ज्यादातर लोगों ने कहा कि आजादी को 71 साल बीत गए। यहां से चुने गए जनप्रतिनिधि किभी भी पार्टी के रहे हों उन्होंने क्षेत्र के विकास के बारे में नहीं सोचा। 
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चुनावी मुद्दों की बात करें तो एक व्यक्ति ने कहा कि इस बार चुनाव में पार्टी के प्रत्याशी को देखकर ही वोट डाले जाएंगे। बता दें कि अब तक पन्ना में भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने प्रत्याशियों का एलान नहीं किया है। 

एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि पन्ना में पानी की गंभीर समस्या है। यहां लाइन बिछ गई है लेकिन पानी की व्यवस्था नहीं हो पाई है। इसी तरह से ऐसे कई मुद्दे हैं जिसमें इलाका बहुत पिछड़ा हुआ है। 

लोगों ने बताया कि पन्ना में रोजगार की कोई सुविधा नहीं है और यहां बहुत ज्यादा बेरोजगारी है। पन्ना सिर्फ हीरे के नाम से प्रसिद्ध है बाकी यहां विकास नहीं हुआ है। 

पन्ना में कोई उद्योग धंधा नहीं है जिसकी वजह से यहां का मजदूर वर्ग रोजी रोटी के लिए दूसरे शहर चला गए। जिसके पास धंधा है वहीं यहां रहता है, बाकी सब बाहर चले गए। पन्ना पिछड़ा हुआ जिला है। लोग चाहते हैं कि चाहे कोई भी पार्टी सत्ता में आए, शिक्षित लोगों को रोजगार मिले। 

स्थानीय दुकानदार ने बताया कि विधायक किभी भी पार्टी का चुना गया हो पन्ना की तरक्की नहीं हुई। नेता कहते बहुत कुछ हैं लेकिन करते कुछ नहीं। 

एक शख्स ने क्षेत्र की समस्याओं पर बात करते हुए गहरी निराशा में कहा कि इस बार चुनाव में लोग नोटा के विकल्प को चुनेंगे। उन्होंने कहा कि पिछले 25 सालों से यहां कोई विकास नहीं हुआ है। उन्होंने भी कहा पन्ना भारत का सबसे पिछड़ा जिला है। 1985 में रेलवे लाइन के लिए सर्वे हुआ था, आज तक रेल नहीं आई। लोगों के पास पैसा हीं नहीं, जनता गरीब है। उबड़-खाबड़ जमीन और सिंचाई की व्यवस्था नहीं है तो लोगों ने खेती छोड़ दी। 

हीरा के खदान हैं जो अब सरकार के नियंत्रण में है। हीरा खदान पहले एनएमडीसी के अधीन था। तब हजारों लोगों वहां काम करते थे। यह कंपनी चार-पांच साल बंद रही जिसके बाद यहां से लोग पलायन करने लगे। 

लोगों का मानना है कि भ्रष्टाचार भी एक अहम मुद्दा है। नेताओं ने सिर्फ अपना घर भरा है। 

लोगों ने सुझाव दिया कि यहां प्राकृतिक सौंदर्य भी भरपूर वनविभाग की बड़ी भूमि, जल प्रपात, मंदिर हैं। पन्ना पर्यटक स्थल बन सकता है। लेकिन नेताओं को विकास के बारे में कोई जानकारी ही नहीं है। 

स्थानीय लोगों ने बताया कि पन्ना में शिक्षा व्यवस्था बहुत बदहाल है। बच्चों के स्कूल ड्रेस और साइकल तक नहीं मिलती। पिछले सत्र में पन्ना में विश्वविद्यालय खुलने की बात हुई तो वह छतरपुर चला गया। मेडिकल कॉलेज खोलने का प्रस्ताव आया तो वह भी सतना चला गया। इसकी वजह नेताओं की कमी है। पन्ना में कोई मुखर नेता नहीं है। 

स्वास्थ्य सेवाओं के नाम सरकारी अस्पताल है लेकिन उसमें अच्छे डॉक्टर नहीं हैं। किसी मरीज की थोड़ी से भी तबीयत बिगड़ तो उसे रीवा, जबलपुर रेफर कर दिया जाता है। 

पन्ना का विकास नहीं होने के कारण लोगों में बहुत रोष है। लोगों का कहना है कि लोग इस किसी भी पार्टी के जनप्रतिनिधि को नहीं चुनेंगे। बल्कि इस बार वे नोटा के विकल्प को चुनेंगे। 
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