मध्यप्रदेश में लगातार चौथी बार सत्ता पर काबिज होने के प्रयास में जुटी भाजपा को उसके ही बागी नेताओं से चुनौती मिल रही है। 15 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं जहां भाजपा के बागी नेता पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ ही ताल ठोक रहे हैं। पार्टी ने जिन नेताओं और वर्तमान विधायकों का टिकट काटा है वो निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में चुनावी मैदान में हैं।
पांच बार के सांसद रामकृष्ण कुसमरिया दमोह से पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार जयंत मलैया के खिलाफ निर्दलीय खड़े हैं। अनूपपुर, कोटमा और पुष्पराजगढ़ में भी पार्टी को बागी नेता चुनौती दे रहे हैं।
भिंड में नरेंद्र सिंह कुशवाह, महेश्वर में राजकुमार मेव और बैरसिया में ब्रह्मानंद रत्नाकर पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ चुनावी मैदान में हैं। भाजपा युवा मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष धीरज पटेरिया जबलपुर उत्तर से पार्टी के उम्मीदवार और सूबे के स्वास्थ्य मंत्री शरद जैन को चुनौती दे रहे हैं।
पार्टी की ओर से टिकट नहीं दिए जाने पर पटेरिया ने पिछले दिनों पार्टी को अलविदा कह दिया था। मैदान में पटेरिया के कूदने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है, जिसका फायदा कांग्रेस को मिल सकता है।
कई क्षेत्रों में परिवार के सदस्य ही भाजपा के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ खड़े हैं। जबलपुर जिले के बरगी में भाजपा की वर्तमान विधायक प्रतिभा सिंह के खिलाफ उनकी बहू को समाजवादी पार्टी ने मौका दिया है। भाजपा ने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ खड़े बागियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
कई बागियों ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली है मगर वो अब भी पार्टी के लिए खतरा बने हुए हैं। पूर्व वित्त मंत्री राघवजी अपनी बहु ज्योति शाह के लिए विदिशा की शमशाबाद सीट से टिकट की मांग कर रहे थे। टिकट नहीं मिलने पर वह खुद निर्दलीय खड़े हो गए। पार्टी के दबाव में उन्होंने अपना नामांकन तो वापस ले लिया मगर दावा किया कि पार्टी का उम्मीदवार नहीं जीतेगा।
भाजपा इस बात को लेकर चिंतित है कि कहीं ये बागी नेता पार्टी के खिलाफ काम करके न नुकसान पहुंचाए। मध्यप्रदेश में सभी 230 सीटों के लिए एक ही चरण में 28 नवंबर को मतदान होना है। चुनाव परिणाम 11 दिसंबर को घोषित किए जाएंगे।