बांधवगढ़ में मृत बाघ (फाइल फोटो)
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में बाघों की मौत के मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस संबंध में हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया है कि राज्य में अब तक 40 बाघों की मौत हुई है। इस मामले में भी राज्य देश में सबसे आगे है। इसे देखते हुए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है।
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की बेंच ने सोमवार को भोपाल के वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे की याचिका पर सुनवाई की। राज्य सरकार के साथ-साथ नेशनल टाइगर कंजर्वेशन ऑथोरिटी को भी नोटिस जारी किया गया है। मामले की अगली सुनवाई 7 जनवरी को होगी। याचिका में कहा गया है कि इस वर्ष देश में 107 बाघों की मौत हुई है। इसमें मध्य प्रदेश में 36 बाघों की मौत हुई है। याचिका दाखिल करने के बाद भी चार और बाघों की मौत हुई है, जिससे यह संख्या बढ़कर 40 तक पहुंच गई है।
कान्हा में सबसे ज्यादा मौतें
याचिका में कहा गया है कि 2012 से 2019 के बीच कान्हा नेशनल पार्क में 43, बांधवगढ नेशनल पार्क में 38, पेंच नेशनल पार्क में 17, सतपुडा नेशनल पार्क में 4 और पन्ना के नेशनल पार्क में 7 बाघों की मौत हुई है। बाघों की मौत के मामले में कान्हा नेशनल पार्क देश में पहले तथा बांधवगढ चौथे स्थान पर है। अजय दुबे की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता आदित्य संघी ने कोर्ट से अनुरोध किया कि प्रदेश में बाघों के शिकार को रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठाना आवश्यक हो गया है। बाघों की सुरक्षा के लिए स्पेशल फोर्स तैनात करने के निर्देश जारी करें।
रेडियो कॉलर के बाद भी सुरक्षा नहीं
याचिका में आरोप लगाया गया है कि सुरक्षा की दृष्टि से बाघों को रेडियो कॉलर लगाई जा रही है। इसके बाद भी पन्ना नेशनल पार्क में युवा मादा बाघ की कुंए में लाश मिली थी। एक बाघ की मौत ट्रेन की चपेट में आने से हुई थी। बांधवगढ के कोर एरिया में भी एक बाघ का शव मिला था। प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने भी एक नोटिफिकेशन जारी किया है। इसमें भी बाघों की मौत पर चिन्ता जताई गई है और 13 बिन्दुओं पर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नोटिफिकेशन में इस बात का उल्लेख है कि बाघों के कई शवों का तो पोस्टमार्टम तक करवाना संभव नहीं था। इसमें बाघों की संदिग्ध मौतों का हवाला दिया गया है।