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मध्यप्रदेश: विधानसभा में पप्पू, वेंटिलेटर, चमचा, जनसंघी, बंटाधार, फेंकू, जैसे शब्द असंसदीय घोषित

Mon, 09 Aug 2021 10:11 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

मध्यप्रदेश विधानसभा ने 1161 शब्दों को असंसदीय बताते हुए सदस्यों से सदन में इनका इस्तेमाल नहीं करने का अनुरोध किया है। इसके लिए बाकायदा एक पुस्तिका जारी की गई है। 
 
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असंसदीय शब्दों की पुस्तिका का विमोचन करते स्पीकर गिरीश गौतम, सीएम शिवराज, पूर्व सीएम कमलनाथ व मंत्री नरोत्तम मिश्रा - फोटो : ani
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विस्तार
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मध्यप्रदेश विधानसभा में 1161 शब्दों को असंसदीय माना जाएगा। सोमवार से शुरू हुए विधानसभा के मानसून सत्र से पहले स्पीकर गिरीश गौतम ने इन शब्दों की सूची जारी कर सदस्यों से इनका इस्तेमाल नहीं करने का अनुरोध किया। देश की किसी विधानसभा में संभवत: पहली बार इस तरह की सूची जारी की गई है। 
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‘असंसदीय शब्द एवं वाक्यांश संग्रह’ पुस्तक का रविवार को विमोचन किया गया। सदन की गरिमा बनी रहे और सदस्यों द्वारा कहे गए ऐसे शब्दों को बार-बार विधानसभा के रिकॉर्ड से  हटाना न पड़े, इसलिए 38 पृष्ठों की इस पुस्तक को तैयार किया गया है। इसमें 1,161 असंसदीय शब्दों एवं वाक्याशों का संग्रह है। ये वो शब्द हैं, जो वर्ष 1954 से लेकर अब तक विधानसभा के रिकॉर्ड से हटाए गए हैं। 
अब सदन में ‘पप्पू’ एवं ‘मिस्टर बंटाधार’ जैसे शब्दों का प्रयोग नहीं होने की उम्मीद है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी को मजाक उड़ाते हुए भाजपा समर्थक उन्हें ‘पप्पू’ और पूर्व सीएम व राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह को 'मिस्टर बंटाधार' कहते हैं।
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उक्त पुस्तक का विमोचन रविवार को भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम, नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ, प्रदेश के गृह एवं संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा तथा प्रदेश के पूर्व संसदीय कार्य मंत्री व प्रतिपक्ष के मुख्य सचेतक डॉ. गोविंद सिंह ने किया।
शब्द चयन उचित होना जरूरी : शिवराज
मुख्यमंत्री चौहान ने कार्यक्रम में कहा कि हमारी संस्कृति, संस्कार, जीवन मूल्य और शिष्टता यह कहती है कि शब्दों का उचित चयन होना आवश्यक है। संसद तथा विधानसभा में विभिन्न विषयों को प्रस्तुत करते समय कभी-कभी क्रोध, आवेश या आक्रोश में ऐसे शब्द निकल जाते हैं, जो सामान्य शिष्टाचार की परिधि के बाहर होते हैं। शब्दों का चयन ऐसा होना चाहिए, जिससे कोई आहत न हो। 
लोस व विस लोकतंत्र के मंदिर : कमलनाथ
पूर्व सीएम व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि लोकसभा एवं विधानसभा दोनों ही प्रजातंत्र के मंदिर माने जाते हैं। उन्होंने सवाल किया कि इस पुस्तक के प्रकाशन की जरूरत ही क्यों पड़ी।
सदस्य असंसदीय शब्दों का उपयोग न करें : स्पीकर गौतम
विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने कहा कि इस पुस्तिका में उन शब्दों एवं वाक्यांशों का संग्रह है, जिन्हें सदन से पहले कार्यवाही से हटाया गया है। विधायक इस पुस्तिका का अध्ययन करें और ऐसे असंसदीय शब्दों एवं वाक्यांशों का उपयोग सदन में न करें।
वेंटिलेटर की जगह क्या कहेंगे : कांग्रेस
इस सूची को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं। कांग्रेस ने कहा कि जिन शब्दों को और संसदीय बताया गया है उनमें एक शब्द वेंटिलेटर भी है। कोरोना काल में बड़ी संख्या में खराब वेंटिलेटर की शिकायत सामने आई थी। ऐसे में विधायक अगर राज्य सरकार से सवाल पूछेंगे तो वेंटिलेटर की जगह किस शब्द का इस्तेमाल करेंगे?
सूची में शामिल कुछ प्रमुख शब्द
धोबी के कुत्ते की तरह, छुट्टे सांडों की तरह फिरना, कलमुंही, सफेदपोश गुंडे, बेशर्मों की तरह बैठना, मूर्खतापूर्ण, बेशर्म, झूठा, टुच्चा, ढोंगी, पाखंडी, नालायक, जमूरा, औकात, पापी, भाड़ में जाए, निकम्मा, भ्रष्टाचारी मुख्यमंत्री नहीं चलेगा, बकवास, अय्याशी, निकम्मी सरकार, धिक्कार, दस नंबरी, यार, मक्खनबाजी, भांड, चमचे, मिर्ची लगना, भ्रष्टाचारी, फालतू की बात, मोटी अकल, लल्लू मुख्यमंत्री, पागल, ढपोलशंखी, गप्पी दास, धिक्कार, ओछी, बंटाढार।
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