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लॉकडाउन और बेमौसम बारिश से प्याज के किसानों के निकले आंसू

Sun, 03 May 2020 08:13 AM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
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onion - फोटो : अमर उजाला
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देश में कोरोना वायरस के बढ़ते प्रसार को रोकने के लिए लॉकडाउन लागू किया गया है। लेकिन इससे प्याज के किसानों को भयंकर नुकसान हुआ है। लॉकडाउन के कारण बाजारों तक पहुंच और मंडियों के बंद होने की वजह से प्याज के किसानों को फसल की लागत से भी कम पर प्याज बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। 

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इस साल प्याज का उत्पादन अच्छा हुआ था, लेकिन मंडियों के बंद होने से किसान धीरे-धीरे गहरे वित्तीय संकट की ओर बढ़ रहे हैं। साथ ही खरीदारों की कमी और बेमौसम बारिश के कारण फसल के बर्बाद होने की संभावना भी बढ़ रही है। 

सांवेर, महू, देपालपुर और इंदौर के किसानों ने दावा किया कि उन्होंने खरीददारों के न होने के चलते इस सप्ताह फसल की कीमत छह से सात रुपये प्रति किलो तय कर दी। किसानों ने बताया कि फसल की लागत ही आठ से नौ रुपये प्रति किलो है, लेकिन हमारे पास दूसरा कोई रास्ता नहीं है, इसलिए मजबूरन हमें इस कीमत पर फसल बेचने के लिए तैयार होना पड़ा। 
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इंदौर जिले के कनाडिया गांव के रहने वाले एक किसान दिलीप मुकाती जिनके पास 500 बोरी (एक बोरी में 60 किलोग्राम) का स्टॉक है। उन्होंने बताया कि मैं अभी तक एक बोरी भी नहीं बेच पाया हूं। कुछ खरीददार खेतों पर आते हैं और मुझे सात से आठ रुपये प्रति किलो की कीमत देने को कहते हैं, जो कि लागत से बहुत ही कम है। 

मुकाती ने बताया कि किसानों के पास कोई चारा नहीं है, उनके पास दो ही रास्ते हैं, या तो वो जो कीमत मिल रही है उस पर अपनी फसल बेच दें। या फिर खुले आसमान में अपनी फसल को बर्बाद होते देखें। 

किसानों ने दावा किया लॉकडाउन के बीच इस क्षेत्र में बिचौलियों की बढ़ती मौजदूगी से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। वहीं, बिचौलियों को जमकर मुनाफा हुआ है। उन्होंने कहा, अधिकांश किसानों के पास खेतों में भंडारण की सुविधा का अभाव और पैसे की कमी है। जो उन्हें उत्पादन लागत से नीचे बेचने के लिए मजबूर कर रही है।

महू तहसील के एक अन्य किसान दिनेश पाटीदार ने कहा कि मेरे पास स्टॉक में प्याज की 2000 बोरियां हैं। न तो कोई परिवहन उपलब्ध है, और न ही व्यापारी हम तक पहुंच पा रहे हैं, ताकि हमें उचित मूल्य मिल सके। उन्होंने बताया कि पिछले साल उन्हें 30 रुपये से लेकर 40 रुपये प्रति किलो मिले थे। लेकिन इस साल उन्हें दो व्यापारियों द्वारा छह रुपये प्रति किलोग्राम की पेशकश की गई है।

किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि वह किसानों को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचने में मदद करे, जिससे आपूर्ति श्रृंखला में बिचौलियों को हटाया जा सके। इंदौर नगर निगम (आईएमसी) विक्रेताओं के माध्यम से आलू और प्याज की शहर में आपूर्ति कर रहा है। साथ ही वह सब्जियों की भी आपूर्ति करने की योजना बना रहा है। 

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