जिले की ढीमरखेड़ा तहसील में सरकारी जमीन का पट्टा दिलाने के नाम पर ग्रामीणों के साथ धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि दो बिचौलियों ने खुद को प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क में होने का दावा करते हुए कई ग्रामीणों को सरकारी जमीन का पट्टा दिलाने का भरोसा दिया और उनसे अलग-अलग किस्तों में कुल 2 लाख 17 हजार रुपए वसूल लिए। लंबे समय तक पट्टा नहीं मिलने पर ग्रामीणों ने मामले की शिकायत तहसीलदार से की। जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
अधिकारियों से सांठगांठ का झांसा
पुलिस के अनुसार ढीमरखेड़ा तहसील क्षेत्र में दीपक लोधी और लक्ष्मण सिंह गौड़ पर आरोप है कि दोनों ग्रामीणों को यह भरोसा दिलाते थे कि उनकी प्रशासनिक अधिकारियों से पहचान है और वे सरकारी जमीन का पट्टा स्वीकृत करवा सकते हैं। इसी भरोसे में कई ग्रामीणों ने अलग-अलग समय पर कुल मिलाकर 2 लाख 17 हजार रुपए आरोपियों को दिए।
पट्टा नहीं मिला तो हुआ शक
रकम देने के बाद काफी समय बीतने के बाद भी ग्रामीणों को पट्टा नहीं मिला और न ही कोई प्रक्रिया आगे बढ़ी। इसके बाद ग्रामीणों को अपने साथ धोखाधड़ी होने का शक हुआ और उन्होंने मामले की शिकायत ढीमरखेड़ा तहसीलदार नितिन कुमार पटेल से की। तहसीलदार की ओर से मामले की प्राथमिक जांच कराई गई। जांच में आरोपियों द्वारा पट्टा दिलाने के नाम पर रकम लेने और ग्रामीणों को गुमराह करने के तथ्य सामने आए।
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तहसीलदार की शिकायत पर दर्ज हुई FIR
जांच रिपोर्ट के आधार पर तहसीलदार की लिखित शिकायत पर ढीमरखेड़ा थाना पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया। एसडीओपी आकांक्षा चतुर्वेदी के अनुसार आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।
अन्य लोगों से ठगी की भी जांच
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि दोनों आरोपियों ने सरकारी जमीन का पट्टा या किसी अन्य सरकारी सुविधा दिलाने के नाम पर और कितने लोगों से रकम वसूली है। पुलिस ग्रामीणों से पूछताछ कर रही है और लेनदेन से जुड़े साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान यदि अन्य पीड़ित या नए तथ्य सामने आते हैं तो मामले में अतिरिक्त धाराएं जोड़ी जा सकती हैं। फिलहाल दोनों आरोपियों की भूमिका और कथित ठगी के पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।