उज्जैन में एक कबाड़ी वाले से जबरन जय श्रीराम का नारा लगवाने का मामला सामने आया है। गांव के कुछ युवकों पर जय श्रीराम के नारे लगवाने का आरोप है। सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कुछ युवक एक कबाड़ी वाले से जबरन जय श्रीराम का नारा लगाने के दबाव बना रहे हैं। पुलिस ने दो युवकों को गिरफ्तार कर लिया है। बता दें कि इससे पहले इंदौर में एक चूड़ी बेचने वाले शख्स की जमकर पिटाई की गई थी। चूड़ी बेचने वाले शख्स पर पहचान छुपाने का आरोप था।
दरअसल, उज्जैन के महिदपुर तहसील के झारड़ा थाना क्षेत्र के पिपलिया धुमा फंटे गांव में शनिवार को शनिवार कबाड़ बेचने वाला पहुंचा। इस दौरान गांव के कुछ युवक कबाड़ी वाले का ठेला पर रखे सामान को नीचे फेंक दिए और गांव में नहीं आने की चेतावनी दी। युवकों की इस करतूत को किसी ने मोबाइल पर वीडियो बना लिया और सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया।
एसपी ने लोगों से संयम बरतने की अपील की
इधर एसपी सत्येंद्र कुमार ने कहा कि वर्तमान में जो परिस्थितियां हैं इसमें मैं आम लोगों से यही अपील करना चाहता हूं कि सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने की जो घटनाएं सामने आ रही हैं, इसमें सबको संयम बरतने की जरूरत है। युवकों द्वारा अल्पसंख्यक व्यक्ति के साथ की गई बदसलूकी पर कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से एमपी में लगातार ऐसी घटनाएं देखने को मिल रही हैं, यह दुखद है।
कमलनाथ बोले- सरकार मूकदर्शक बनी
मप्र कांग्रेस अध्यक्ष व पूर्व सीएम कमलनाथ ने कहा कि ऐसी ही घटनाएं पहले इंदौर व देवास में हो चुकी है। उन्होंने सवाल किया कि क्या ये घटनाएं किसी खास एजेंडे के तहत हो रही हैं? सरकार मूक दर्शक बनकर सब कुछ देख रही है। पूरे प्रदेश में अराजकता का वातावरण बनाया जा रहा है।
क्या कांग्रेस बना रही वीडियो : विश्वास सारंग
इधर, मप्र के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि राज्य सरकार ऐसी सभी घटनाओं के आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है। हम ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए वचनबद्ध हैं। उन्होंने सवाल किया कि ऐसे वीडियो कांग्रेस के सोशल मीडिया विभाग द्वारा ही वायरल क्यों किए जा रहे हैं? क्या ऐसे वीडियो बनाने में कांग्रेस का हाथ है? क्या वह ही इन्हें फैला रही है?
मुहर्रम पर उज्जैन में तनाव
गौरतलब है कि उज्जैन में मुहर्रम पर पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए गए थे। इससे भी दो पक्षों में तनाव बढ़ गया था। कुछ हिंदूवादी संगठनों ने इसका विरोध किया था। हालांकि, पुलिस ने आरोपियों को रासुका कानून के तहत गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था, जिसके बाद कोर्ट ने जेल भेज दिया।