गलत जानकारी देकर वाहन बेचने को जिला उपभोक्ता आयोग ने सेवा में कमी व अनुचित व्यापार प्रथा माना है। आयोग ने प्रेस्टीज व्हीकल प्राइवेट लिमिटेड मदन महल के प्रबंधक को आदेश दिया कि दो माह के भीतर वाहन वापस प्राप्त कर दो लाख दस हजार रुपये लौटाए जाएं। इसके अलावा परिवादी को मानसिक क्षतिपूर्ति बतौर पांच हजार व मुकदमे का खर्च तीन हजार रुपये भी अदा किया जाए।
परिवादी त्रिमूर्ति नगर निवासी सुरेंद्र तिवारी की तरफ से दायर किए गए आवेदन में कहा गया था कि उसने प्रेस्टीज व्हीकल प्राइवेट लिमिटेड से सेकंड हैंड कार खरीदी थी। उसे कार के संबंध में गलत जानकारी दी गई थी। आवेदनकर्ता के अधिवक्ता मनीष मिश्रा की तरफ से जिला उपभोक्ता आयोग के चेयरमैन पंकज यादव व सदस्य अमित सिंह तिवारी व सोनल पंडित की पीठ को बताया गया कि विक्रय के समय अच्छी कंडीशन होने और महज 56 हजार किलोमीटर चलना बताया गया था। कार खरीदने के कुछ समय बाद उसमें गड़बड़ी आने लगी। जांच कराने पर पता चला कि वह कार एक लाख 43 हजार 228 किलोमीटर चल चुकी थी। इसके अलावा कार में अन्य गड़बड़ी थी, जिसके संबंध में क्रेता से जानकारी छुपाई गई थी। गलत जानकारी देकर क्रेता के साथ धोखा करते हुए कार को बेचा गया था। जो अनुचित व्यापार तथा सेवा की कमी की श्रेणी में आया है। आवेदन की सुनवाई के बाद आयोग ने आवेदन के पक्ष में उक्त राहतकारी आदेश जारी किए।