जबलपुर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक जीवित व्यक्ति को मृत दिखाकर उसकी जमीन फर्जी तरीके से अपने नाम करवाने की साजिश रची गई। इस मामले में ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा) ने तहसीलदार, पटवारी, अधिवक्ता और मुख्य आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी व जालसाजी का प्रकरण दर्ज किया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रेमनगर निवासी भूपेन्द्र सिंह पिता स्व. अमर सिंह ग्रेवाल, उम्र 60 वर्ष ने ईओडब्ल्यू में शिकायत दर्ज कराई थी कि कुछ लोगों ने राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से उनके पिता अमर सिंह ग्रेवाल का फर्जी मृत्यु प्रमाण-पत्र बनवाकर एक भूखंड का नामांतरण अपने नाम पर करवा लिया है।
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ईओडब्ल्यू की जांच में खुलासा हुआ कि अमर सिंह की मृत्यु 1 मई 1969 को होना दर्शाया गया, लेकिन इस संबंध में कोई अधिकृत प्रमाण-पत्र मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी संभाग क्रमांक-02 द्वारा जारी नहीं किया गया था। जांच में पाया गया कि जो मृत्यु प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया, वह अमर सिंह पिता करतार सिंह के नाम से कूटरचित था, जो कि शिकायतकर्ता के पिता से भिन्न व्यक्ति है।
आरोपी हरचंद सिंह पिता स्व. अमरसिंह कैथ, निवासी मदन महल ने अपने मकान (बसरा नंबर-17) के नामांतरण के लिए अधिवक्ता रजनी दीवान के माध्यम से तहसील कार्यालय गोरखपुर में आवेदन दिया था। पटवारी शिखा तिवारी ने स्थल का पंचनामा और नक्शा तैयार किया, जबकि तहसीलदार भरत सोनी ने नियमों की अनदेखी करते हुए और भिन्न खसरों के बावजूद, 7 जून 2024 को नामांतरण आदेश जारी कर दिए।
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ईओडब्ल्यू ने जांच के बाद पाया कि यह पूरी प्रक्रिया एक योजनाबद्ध षड्यंत्र के तहत की गई थी। तहसीलदार भरत सोनी, पटवारी शिखा तिवारी, अधिवक्ता रजनी दीवान और मुख्य आरोपी हरचंद सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और पद के दुरुपयोग का मामला दर्ज किया गया है।