मध्य प्रदेश में तेजी से फैल रहे डेंगू के प्रकोप के खिलाफ हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम पर डेंगू की रोकथाम के लिए उचित कदम न उठाने का आरोप लगाया गया। इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने जबलपुर और भोपाल नगर निगमों को तीन दिनों के भीतर स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं।
यह याचिका हरदा निवासी और आरटीआई कार्यकर्ता डॉ. विजय बजाज द्वारा दायर की गई थी। याचिका में दावा किया गया कि प्रदेश के सरकारी और निजी अस्पताल डेंगू पीड़ित मरीजों से भरे हुए हैं, और डेंगू के मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। इस साल डेंगू वायरस अधिक शक्तिशाली होने के कारण अधिक मौतें हो रही हैं। राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र की रिपोर्ट का हवाला देते हुए याचिका में कहा गया कि 2022 की तुलना में 2023 में डेंगू के मामलों में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता आदित्य संघी ने कोर्ट को बताया कि स्थिति गंभीर होती जा रही है, और नगर निगम सिर्फ वीआईपी क्षेत्रों में ही फॉगिंग और कीटनाशक छिड़काव कर रहा है, जबकि शहर के अन्य इलाकों में केवल डीजल का छिड़काव किया जा रहा है। उन्होंने अनुच्छेद 21 के तहत हर नागरिक के जीवन के अधिकार का हवाला देते हुए तर्क दिया कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की तत्काल आवश्यकता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सितम्बर माह में 600 मरीज पाए गए थे, जबकि वास्तविक संख्या लगभग 2800 के करीब है। कोर्ट ने याचिका की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए नगर निगमों को स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया और मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की है।