रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कुलपति पर एक महिला सहायक कुलपति ने प्रताड़ित करने के आरोप लगाये थे। शिकायत में कुलपति पर अशोभनीय टिप्पणी,अभद्र इशारे,अपमानित तथा मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की बात गयी थी। राज्य महिला आयोग ने षिकायत को गंभीरता से लेते हुए विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति से जांच करवाने के आदेष जिला कलेक्टर को जारी किये हैं।
गौरतलब है कि महिला सहायक कुलसचिव की तरफ से की गयी शिकायत में कहा गया है कि कुलपति आर के वर्मा ने 21 नवम्बर को अपने कक्ष में चर्चा के लिए बुलाया था। उनके साथ अधीनस्थ कर्मचारी भी पहुंचे थे और चर्चा में वह सिर्फ अकेली महिला थी। कुलपति ने अधीनस्थ को मुझसे काम करवाने निर्देशित करते हुए मेरे खिलाफ अशोभनीय टिप्पणी तथा अभद्र इशारे किये गये। इसी दिन शाम 6 बजे आईक्यूएसी कार्यालय में बैठक के बाद आईआईटी परीक्षा की तिथि में बनाए जाने के संबंध में झूठे आरोप लगाये। परीक्षा की तिथि कुलपति के अनुमोदन से बनाई गयी थी। उनके द्वारा छात्रों, कर्मचारियों, सहकर्मियों के सामने कुलपति ने उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया।
इस पूर्व ऑफिशियल वाट्सअप ग्रुप में 13 अक्टूबर की देर रात अतिथि मानदेय भुगतान के संबंध में अतिथि शिक्षकों तथा विभागाध्यक्षों ने अषोभनीय व अनर्गल टिप्पणी की गयी। जिसकी शिकायत उनके द्वारा अगले दिन कुलपति से की गयी थी परंतु उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद 20 तथा 21 नवम्बर के दिन देर रात ऑफिशियल वाट्सअप ग्रुप में उनके खिलाफ उसी तरह की टिप्पणी की गयी। कुलपति ने कोई कार्यवाही नहीं करते हुए साक्ष्य मिटाने के लिए संबंधित व्यक्तियों से वाट्सअप चौट से मैसेज डिटिल करवा दिये। इसके अलावा कर्मचारी संघ के पदाधिकारी भी अनुचित कार्य के लिए दबाव बनाते है। शिकायत करने के बावजूद भी कुलपति उन्हें संरक्षण प्रदान कर रहें हैं।
जिला कलेक्टर दीपक सक्सेना ने राज्य महिला आयोग के आदेश का उल्लेख करते हुए जांच के लिए रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कुलसचिव को जांच के लिए पत्र जारी किया है। पत्र में कहा गया है कि महिलाओं का कार्यस्थल पर लैगिंक उत्पीड़न निवारण, प्रतिबंध एवं प्रतितोष अधिनियम 2013 की धारा 4 के तहत कार्यालय में गठित आंतरिक समिति से शिकायत की जांच कराई जाएं। जांच रिपोर्ट आवश्यक रूप से जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग जबलपुर से प्रेषित की जाए।