मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोपाल के पार्षद को राहत देते हुए उनका आर्म्स लाइसेंस रद्द करने संबंधी कलेक्टर के आदेश को निरस्त कर दिया है। हाईकोर्ट जस्टिस मनिंदर एस. भट्टी की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि जिला कलेक्टर ने लाइसेंस निरस्त करते समय अपने ही पूर्व आदेश पर विचार नहीं किया। एकलपीठ ने लाइसेंस की श्रेणी को खेल से आत्मरक्षा में बदलने की वैधता की जांच नए सिरे से किए जाने के आदेश जारी किए हैं।
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भोपाल निवासी मोहम्मद सऊद की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि उनके पास वर्ष 2012 से खेल श्रेणी में शस्त्र लाइसेंस था। इस्तेमाल किए गए कारतूस खाली खोखे जमा नहीं किए जाने पर उसके खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। उनकी तरफ से पेश किए गए जवाब में कहा गया था कि राजनीति में सक्रिय हैं और भोपाल में पार्षद भी हैं। इसलिए उन्हें आत्मरक्षा के लिए भी शस्त्र लाइसेंस की आवश्यकता है। इसके बाद तीन सदस्यीय जांच समिति ने लाइसेंस की श्रेणी खेल से आत्मरक्षा में बदलने की सिफारिश की। इसके आधार पर 18 मार्च 2026 को जिला प्रशासन ने लाइसेंस की श्रेणी बदलने का आदेश जारी किया। उसी समिति ने एक अन्य रिपोर्ट में मोहम्मद सऊद को निष्क्रिय निशानेबाज बताते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं में भाग नहीं लिया है। जिला कलेक्टर ने रिपोर्ट के आधार पर 2 अप्रैल 2026 को उनका शस्त्र लाइसेंस निरस्त कर दिया। जिसके खिलाफ उक्त याचिका दायर की गई थी।
एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि कलेक्टर ने लाइसेंस निरस्त किए जाने के आदेश में समिति की पिछली रिपोर्ट का उल्लेख नहीं किया गया है। इसके अलावा श्रेणी बदलने के संबंध में पारित आदेश का उल्लेख नहीं किया गया है। एकलपीठ ने अपने आदेश में जिला कलेक्टर को निर्देशित किया है कि 60 दिनों के भीतर कारणयुक्त आदेश पारित कर लाइसेंस की श्रेणी बदलने की वैधता पर निर्णय लें। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि शस्त्र अधिनियम की धारा 17 में लाइसेंस की शर्तों में बदलाव का प्रावधान है, लेकिन लाइसेंस की प्रकृति बदलने की स्पष्ट व्यवस्था नहीं है।