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MP News: अपात्र नर्सिंग कॉलेज के छात्र हो सकेंगे परीक्षा में शामिल, हाईकोर्ट ने राहत देते हुए दिया अंतिम अवसर

Tue, 19 Mar 2024 12:34 PM IST
दिनेश शर्मा अमर उजाला, न्यूज डेस्क, जबलपुर

सार

अपात्र पाए गए नर्सिंग कॉलेज के छात्रों को परीक्षा में शामिल करने की अनुमति मिल गई है। हाईकोर्ट ने आदेश में कहा है कि छात्र परीक्षा उत्तीर्ण नहीं करते हैं तो उन्हें कोई अतिरिक्त लाभ नहीं दिया जाए। परीक्षा उत्तीर्ण करने पर वे आगे के लिए प्रात्र माने जाएंगे।
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नर्सिंग कॉलेज के छात्रों को परीक्षा में शामिल करने की अनुमति मिल गई है। - फोटो : file photo
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विस्तार
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सीबीआई की जांच में अपात्र पाए गए नर्सिंग कॉलेज के छात्रों को परीक्षा में शामिल करने की अनुमति मिल गई है। हाईकोर्ट जस्टिस संजय द्विवेदी तथा जस्टिस एके पालीवाल की युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है छात्र स्नातक नहीं हैं। सरकारी कर्मचारियों की गलतियों का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। छात्रों को एक अवसर प्रदान करते हुए परीक्षा में शामिल करने के आदेश जारी किए हैं। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि छात्र परीक्षा उत्तीर्ण नहीं करते हैं तो उन्हें कोई अतिरिक्त लाभ नहीं दिया जाए। परीक्षा उत्तीर्ण करने पर वे आगे के लिए प्रात्र माने जाएंगे।
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गौरतलब है कि लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन की तरफ से प्रदेश में संचालित फर्जी नर्सिंग कॉलेजों के संचालन को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका की सुनवाई के दौरान प्रदेश के सभी नर्सिंग कॉलेजों की जांच करने के आदेश सीबीआई को दिए थे। सीबीआई की तरफ से 308 कॉलेज की जांच रिपोर्ट बंद लिफाफे में रिपोर्ट पेश की गई थी। सीबीआई ने बताया था कि सुप्रीम कोर्ट ने 56 कॉलेजों की जांच पर स्थगन आदेश जारी किए हैं।  सीबीआई रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में संचालित 169 नर्सिंग कॉलेज पात्र पाए गए हैं। जबकि 74 नर्सिंग कॉलेज ऐसे पाए गए जो मानकों को तो पूरा नहीं करते हैं, किंतु उनमें ऐसी अनियमितताएं हैं जिन्हें सुधारा जा सकता है तथा 65 कॉलेज आयोग्य पाए गए है। युगलपीठ ने अपने आदेश में अपात्र पाए गए कॉलेजों को किसी भी प्रकार की राहत देने से इंकार कर दिया था। इन कॉलेजों के छात्रों को किसी अन्य कॉलेजों में समायोजित नहीं करने की बात भी कही थी।

युगलपीठ ने अपने आदेश में मानक पूरा नहीं करने वाले कॉलेजों की खामियां दूर करने हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस आर के श्रीवास्तव की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित की थी। हाईकोर्ट ने आदेश जारी किए थे कि कमेटी सीबीआई की रिपोर्ट के आधार पर मानक पूरा नहीं करने वाले कॉलेजों को खामियां दूर करने समय प्रदान करेगी। निर्धारित समय अवधि के बाद कॉलेजों की रिपोर्ट व राज्य सरकार को सौंपी जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर खामियां दूर नहीं करने वाले कॉलेजों पर राज्य सरकार कार्रवाई करेगी। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि कमेटी मान्यता प्रणाली और संबंधित नियम को मजबूत करने तथा संस्थानों में सुधार के संबंध में अपने सुझाव दे सकते है। कॉलेजों को मान्यता देने के लिए निरीक्षण करने वाले दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा के निर्देश भी कमेटी को दिए गए थे। अयोग्य घोषित किए गए कॉलेज के छात्रों की तरफ से इंटर विनर बनने का आवेदन दायर करते परीक्षा में शामिल करने की राहत प्रदान करने का आग्रह किया था। युगलपीठ ने आवेदन का निराकरण करते हुए पूर्व में पारित आदेश में संशोधन करते हुए छात्रों को राहत प्रदान की है। 
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