मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने गर्भधारण एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीकी (लिंग प्रतिषेध) अधिनियम के नियम 9(1) व 9(4) के उल्लंघन करने के मामले को सख्ती से लिया। अदालत ने आरोपी मिनोचा सोनोग्राफी सेंटर के संचालक डॉ. पीसी मिनोचा को भ्रूण परीक्षण का दोषी पाते हुए दो वर्ष के सश्रम कारावास व चार हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
अदालत को अभियोजन पक्ष की ओर से बताया गया कि उक्त परिवाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जबलपुर की ओर से दायर किया गया है। इसमें कहा गया कि मप्र शासन लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के आदेश पर 4 जुलाई 2007 द्वारा उक्त अधिनियम की धारा के तहत राज्य स्तरीय निरीक्षण दल व पर्यवेक्षण दल का गठन किया गया था। 13 फरवरी 2017 को जांच दल ने सोनोग्राफी सेंटरों का निरीक्षण किया। निरीक्षण उपरांत फॉर्म एफ और एएनसी रजिस्टर में गर्भवती महिलाओं की पूर्णत: जानकारी का उल्लेख न होना पाया गया। जिस पर आरोपी सोनोग्राफी सेंटर के संचालक डॉक्टर पीसी मिनोचा के खिलाफ प्रकरण बनाकर उक्त परिवाद दायर किया गया। इसमें आठ अभियोजन साक्षी शासन की ओर से पेश किए गए। अदालत ने गर्भधारण एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीकी (लिंग प्रतिषेध) अधिनियम के नियम 9(1) व 9(4) के उल्लंघन करने का दोषी पाते हुए डॉक्टर मिनोचा को उक्त सजा से दंडित किया। मामले में शासन की ओर से भारती उइके ने पक्ष रखा।