हलफनामा पेश करने के बावजूद भी आदेश का परिपालन नहीं किए जाने को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने आयुक्त परिवहन विभाग को 24 घंटे में व्यक्तिगत रूप से तलब होने के आदेश जारी किए हैं। युगलपीठ ने कहा है कि उपस्थित नहीं होने की स्थिति में उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया जाएगा। याचिका पर अगली सुनवाई बुधवार 17 जनवरी को निर्धारित की गई है।
विधि छात्रा ऐश्वर्या शांडिल्य की तरफ से सड़क दुर्घटना में हुई दो व्यक्तियों की मौत का हवाला देते हुए ग्वालियर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। चीफ जस्टिस के निर्देश पर याचिका सुनवाई के लिए मुख्य पीठ में स्थानांतरित की गई थी। याचिका में कहा गया था कि दुर्घटना के समय दो पहिया वाहन चालक हेलमेट लगाए होते तो उनकी मौत नहीं होती। अधिकांश सड़क दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से सिर में चोट आने के कारण दोपहिया वाहन सवारों की मौत होती है।
याचिका में कहा गया था कि सर्वाेच्च तथा उच्च न्यायालय ने दो पहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट की अनिर्वायता के संबंध में आदेश जारी किए हैं। मोटर व्हीकल एक्ट में भी हेलमेट लगाकर वाहन चलाने का प्रावधान है। चौपहिया वाहनों के लिए सीट बेल्ट लगाना तथा वाहनों में हाई सिक्योरिटी नम्बर प्लेट लगाना भी आवश्यक है, जिसका प्रदेश में पालन नहीं किया जाता है। मोटर व्हीकल एक्ट में दिए गए प्रावधानों का सख्ती से पालन किया जाए, जो सड़क दुर्घटना में मौतों के ग्राफ में कमी आएगी।
पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से चालानी कार्रवाई का डेटा पेश किया गया था, जिस पर युगलपीठ ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा था कि सड़कों पर हेलमेट लगाकर वाहन चलाते लोग नजर नहीं आते है। कागजी कार्रवाई नहीं बल्कि मैदानी कार्रवाई करनी चाहिए। मोटर व्हीकल एक्ट का परिपालन निश्चित तौर पर किया जाना चाहिए। युगलपीठ ने सरकार पर 25 हजार रुपये की कॉस्ट लगाई थी।
पिछली सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से बताया गया कि परिवहन आयुक्त ने वाहनों में हाई सिक्योरिटी नम्बर प्लेट लगाने के संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। इसके अलावा पुलिस मुख्यालय के एडीजीपी ने दो पहिया वाहन सवारों के लिए हेलमेट तथा चार पहिया वाहनों के लिए सीट बेल्ट लगाकर वाहन चलाने के संबंध में भी आदेश जारी किए हैं। इसके लिए दो महीने का विशेष चेकिंग अभियान चलाने के आदेश भी जारी किए है। वाहनों में हाई सिक्योरिटी नम्बर प्लेट की अनिर्वायता के लिए सरकार के आग्रह पर हाईकोर्ट ने छह महीने का समय प्रदान किया था।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अवधेश सिंह तोमर ने बताया कि याचिका पर मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से हेलमेट तथा सीट बेल्ट की अनिर्वायता के संबंध में चलाए जा रहे अभियान व चालानी कार्रवाई के संबंध में जानकारी प्रस्तुत की। हाई सिक्योरिटी नम्बर प्लेट के लिए युगलपीठ ने समय प्रदान करने का आग्रह किया, जिस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए आदेश जारी किए।