मध्यप्रदेश के वन क्षेत्र तथा नेशनल पार्क में आग लगने की घटनाओं के संबंध में दायर याचिकाओं को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने जवाब पेश करने के लिए अनावेदकों को अंतिम अवसर प्रदान किया है।
गौरतलब है कि प्रदेश के बांधवगढ़, शहडोल सहित अन्य वन्य क्षेत्रों में आग लगने की घटनाओं के मामले में स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग करते हुए हाईकोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस को पत्र लिखा गया था। हाईकोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस ने पत्र की सुनवाई जनहित याचिका के रूप में करने के आदेश जारी किये थे। इसके अलावा रेड लिंगक्स कॉन्फेडरेशन की तरफ से भी इस संबंध में याचिका दायर की गयी थी।
लॉ स्टूडेंट मनन अग्रवाल की तरफ से लिखे पत्र में कहा गया था कि बांधवगढ़ नेशनल पार्क, शहडोल, उमरिया सहित अन्य वन्य क्षेत्र में आग लगने की घटना हुई थी। आग में वन क्षेत्र का घना जंगल जलकर राख हो गया। बड़ी संख्या में वन्य प्राणी तथा पक्षियों की भी आग के कारण मौत हो गई। पर्यावरण तथा वन्य प्राणियों की दृष्टि से प्राकृतिक रूप से घने जंगल का विशेष महत्व रहता है। वन क्षेत्रों में लापरवाही के कारण अग्नि घटनाएं हुई हैं। अग्नि घटना की स्वतंत्र न्यायिक जांच होनी चाहिए।
रेड लिंक्स कॉन्फेडरेशन की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था, जंगल में लगी आग को रोकने के लिए वन विभाग के पास पर्याप्त संसाधन नहीं है। आग लगने पर वन प्राणियों को एयर लिफ्ट करने की कोई व्यवस्था नहीं है। याचिकाओं की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अधिवक्ता अशुमांन सिंह को कोर्ट मित्र नियुक्त किया था।
याचिका में केन्द्र व राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, नेशनल टाइटर कंजर्वेशन एथॉरिटी सहित अन्य को अनावेदक बनाया गया था। याचिका पर बुधवार को कोर्ट मित्र अधिवक्ता की तरफ से न्यायालय को बताया गया कि अनावेदकों की तरफ से जवाब पेश नहीं किया गया है। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद अनावेदकों को जवाब पेश करने के लिए अंतिम समय प्रदान किया है।