कोरोना काल के दौरान स्कूल फीस के संबंध में हाईकोर्ट द्वारा जारी आदेश के संबंध में याचिकाएं दायर की गयी थी। याचिकाओं की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने पाया कि कोरोना काल समाप्त हो गया है, जिसके कारण याचिकाएं अर्थहीन हो गयी हैं, जिसके बाद युगलपीठ ने सभी याचिकाएं निराकृत कर दी।
हाईकोर्ट द्वारा कोरोना काल के दौरान छात्रों से ट्यूशन फीस नहीं लेने के आदेश जारी किये थे। इस आदेश के संबंध में गैर मान्यता प्राप्त सीबीएससी स्कूल संगठन, गैर मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूल संगठन, नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच, सीता शरण पांडे सहित अन्य आठ की तरफ से याचिका दायर की गयी थी। इसमें कहा गया था कि कोरोना काल पूरी तरफ से समाप्त नहीं हुआ है, जिसके कारण हाईकोर्ट के आदेशानुसार छात्रों से ट्यूशन फीस नहीं ले। स्कूल खुलने के बाद प्रबंधन द्वारा फीस में बढ़ोतरी की गयी है।
स्कूल संचालकों की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि स्कूल प्रारंभ हो गये हैं। स्कूलों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। स्कूल संचालन पढ़ने वाले छात्रों की फीस से होता है। सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने पाया कि कोरोना काल समाप्त हो गया है। युगलपीठ ने याचिका अर्थहीन होने के कारण उनका निराकरण कर दिया।