प्रदेश में कृषि उपज मंडी का कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद भी नए चुनाव नहीं करवाए जाने के खिलाफ याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान सरकार को जवाब पेश करने के लिए अंतिम अवसर प्रदान किया था। याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से जवाब पेश नहीं किया गया। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय मलिमथ व जस्टिस विशाल मिश्रा ने इस गंभीरता से लेते हुए सरकार पर दस हजार रुपये की कॉस्ट लगाई है।
याचिकाकर्ता मनीष शर्मा, नरसिंहपुर निवासी पवन कौरव, जबलपुर निवासी राजेश कुमार वर्मा सहित अन्य की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि मंडी चुनाव वर्ष 2013 में संपन्न हुए थे। जिसका कार्यकाल वर्ष 2018 में समाप्त हो गया है, परंतु अभी तक नये चुनाव नहीं करवाए गए हैं। मंडी बोर्ड अधिनियम में प्रावधान है कि कार्यकाल समाप्त होने के पूर्व यानी पांच साल से पहले नये चुनाव होने चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। आवेदकों का कहना है कि सिर्फ विशेष परिस्थितियों में कार्यकाल को तीन साल या फिर साढ़े तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है, लेकिन चार साल से अधिक का समय गुजर जाने के बावजूद भी चुनावी प्रकिया प्रारंभ नहीं की गई, जो अवैधानिक है। चुनाव न कराना मतदाताओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जवाब पेश करने के लिए अंतिम अवसर प्रदान किया था। सरकार द्वारा जवाब पेश नहीं करने को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार पर दस हजार रुपये की कॉस्ट लगाई है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पक्ष रखा।