मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने परीक्षा परिणाम घोषित होने के कई सालों बाद जन्मतिथि बदलने की मांग वाली याचिका निरस्त कर दी। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने अपने आदेश में साफ किया कि परिणाम घोषित होने के बाद एक निश्चित अवधि में ही परिवर्तन की गुंजाइश होती है। लेकिन इस मामले में 30 वर्ष बाद दावा किया गया है। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायदृष्टांत का हवाला दिया। एचसी ने कहा कि नाम में परिवर्तन कभी भी किया जा सकता है, लेकिन जन्मतिथि में नहीं।
महेंद्र चंद छिंदवाड़ा के रहने वाले हैं। चंद ने माध्यमिक शिक्षा मंडल में हायर सेकंडरी परीक्षा की मार्कशीट में जन्मतिथि में परिवर्तन की मांग करते हुए आवेदन दिया था। माध्यमिक शिक्षा मंडल ने देरी का हवाला देते हुए आवेदन निरस्त कर दिया।
माध्यमिक शिक्षा मंडल की ओर से अधिवक्ता अक्षांश श्रीवास्तव ने दलील पेश की। उन्होंने कहा कि नियमानुसार रिजल्ट घोषित होने के तीन वर्ष तक जन्मतिथि में सुधार किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि जन्मतिथि के सुधार और नाम में बदलाव करने के नियमों में बहुत अंतर है।