मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राजधानी भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड की साइट से जहरीला कचरा हटाए जाने के लिए सरकार, संबंधित अधिकारियों तथा प्रतिवादियों को संयुक्त बैठक कर एक सप्ताह में सभी औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश जारी किए हैं। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि कोई विभाग आदेश का पालन करने में विफल रहता है तो संबंधित प्रमुख सचिव पर अवमानना की कार्यवाही की जाएगी।
कोर्ट ने कहा, जहरीले कचरे को चार सप्ताह में उठाकर विनष्टीकरण स्थल में पहुंचाया जाए। ऐसा नहीं करने पर प्रदेश के मुख्य सचिव तथा और भोपाल गैस त्रासदी राहत और पुनर्वास विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण पेश करना होगा। युगलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई छह जनवरी को निर्धारित की है।
इस साल दायर हुई याचिका
गौरतलब है कि आलोक प्रभाव सिंह द्वारा साल 2004 में याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि भोपाल गैस त्रासदी के दौरान यूनियन कार्बाइड कंपनी से हुए जहरीले गैस रिसाव में लगभग चार हजार से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। भोपाल गैस त्रासदी के बाद यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री में करीब 350 मीट्रिक टन जहरीला कचरा पड़ा है। याचिका में जहरीले कचरे के विनिष्टीकरण की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता की मौत के बाद हाईकोर्ट मामले की सुनवाई स्वतः संज्ञान लेकर कर रहा है।
कोर्ट ने सुनवाई में क्या कहा
याचिका की सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि पूर्व में पारित आदेश का अवलोकन करने पर स्पष्ट होता है कि न्यूनतम प्राप्त किए गए हैं। वर्तमान याचिका वर्ष 2004 में दायर की गई थी और 20 साल बीत गए हैं। प्रतिवादी अभी तक पहले चरण में हैं। वास्तव में यह दुखद स्थिति है, क्योंकि प्लांट साइट से विषाक्त अपशिष्ट को हटाना, एमआईसी और सेविन प्लांट को बंद करना और आसपास की मिट्टी और भूजल में फैले दूषित पदार्थों को हटाना भोपाल शहर की आम जनता की सुरक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। भोपाल में एमआईसी गैस आपदा आज से 40 साल पहले हुई थी।
युगलपीठ ने प्रमुख सचिव, भोपाल गैस त्रासदी राहत और पुनर्वास विभाग को निर्देश किया है कि देश के पर्यावरण कानूनों के तहत अपने वैधानिक दायित्वों और कर्तव्यों का पालन करें। यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री साइट की तत्काल सफाई तथा संबंधित क्षेत्र से पूरे जहरीला कचरे को हटाने और सुरक्षित विनष्टीकरण करने उपचारात्मक उपाय करें। इसकी लागत राज्य सरकार और केंद्र सरकार द्वारा वहन करेंगे।
ठेकेदार को राशि का भुगतान किया जा चुका
केंद्र सरकार की तरफ से युगलपीठ को बताया कि वह अपने हिस्से की राशि 126 करोड़ रुपये पहले ही राज्य सरकार को दे चुके हैं। राज्य सरकार ने राशि खर्च नहीं की है। राज्य सरकार की राशि मिलने की जानकारी देते हुए बताया गया कि ठेकेदार को 20 प्रतिशत राशि का भुगतान किया जा चुका है। संबंधित ठेकेदार ने कोई कार्य प्रारंभ नहीं किया है। सरकार तीन सप्ताह के भीतर प्रक्रिया प्रारंभ कर देगी। मध्यप्रदेश प्रदूषण बोर्ड धार के क्षेत्रीय अधिकारी ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर बताया कि जहरीले कचरे का विनष्टीकरण पीथमपुर में किया जाना है, जिसके लिए हम तैयार हैं। उनके पास 12 ट्रक उपलब्ध हैं, जिसका उपयोग राज्य सरकार जहरीले कचरे के परिवहन के लिए कर सकती है।
युगलपीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपने आदेश में कहा है कि राज्य सरकार की तरफ से 20 मार्च को पेश की गई योजना के अनुसार न्यूनतम अवधि 185 दिन और अधिकतम 377 दिन पूर्ण कर ली जाएगी। हम यह समझने में विफल हैं कि सर्वोच्च तथा इस न्यायालय द्वारा समय-समय पर जारी निर्देश के अनुसार आज तक जहरीले कचरे को हटाने कोई कदम नहीं उठाया गया है। अधिकारी निष्क्रियता में हैं और आगे की कार्रवाई करने से पहले एक और त्रासदी आकार ले सकती है।
युगलपीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि कोई अधिकारी आदेशों के पालन के संबंध में कोई बाधा या रुकावट पैदा करता है तो इसकी जानकारी मुख्य सचिव व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर न्यायालय को प्रदान करेंगे। इससे अगली सुनवाई पर न्यायालय उक्त अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्यवाही कर सकें। जहरीले कचरे के परिवहन और निपटान के दौरान सभी सुरक्षा उपाय किए जाएंगे। प्रतिदिन की प्रगति के साथ तैयार की गयी रिपोर्ट अगली सुनवाई के दौरान प्रमुख सचिव, भोपाल गैस त्रासदी राहत और पुनर्वास विभाग हलफनामे के साथ पेश की जाए।