जबलपुर हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में साफ किया कि यदि आयकर विभाग नकदी जब्त करने के लिए वारंट जारी करता है तो निचली अदालत जब्त की गई नकद राशि और जेवरात की सुपुर्दगी जारी करने का निर्देश नहीं दे सकती। इस मत के साथ न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने अहमदाबाद-गुजरात की मेसर्स मेकटेक फर्म की नीना शाह द्वारा दायर आपराधिक पुनरीक्षण निरस्त कर दी।
एक अक्तूबर 2020 को जीआरपी जबलपुर ने पाटलीपुत्र लोकमान्य तिलक एस्कप्रेस ट्रेन से एक यात्री थाना राम के कब्जे से एक करोड़ 27 लाख रुपये की नकदी और 6.150 किलोग्राम चांदी के जेवर जब्त किए थे। कंपनी का दावा है कि उसका व्यापार पूरे देश में फैला है और उसी सिलसिले में रकम और जेवरात उनका कार्यकर्ता ले जा रहा था।
मामले में रेलवे मेजिस्ट्रेट ने 22 अक्तूबर 2020 को नकदी और जेवर के सुपुर्दगी जारी करने के आदेश दिए। वहीं, इससे पहले आयकर विभाग ने आठ अक्तूबर, 2020 को नकदी जब्त करने के लिए वारंट जारी किया था और रेलवे को कहा था कि अगले आदेश तक सुपुर्दगी जारी नहीं की जाए। बाद में सेशन कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर रेलवे मजिस्ट्रेट के आदेश पर रोक लगा दी थी। इसी को कंपनी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। आयकर विभाग की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ शर्मा ने पक्ष रखा।