जबलपुर कैंट सीट के बीते तीन चुनाव परिणाम
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मध्यप्रदेश के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. ईश्वरदास रोहाणी को राजनीति के चतुर जानकार माना जाता था। कांग्रेस के लिए सुरक्षित माने जाने वाली कैंट विधानसभा में साल 1993 में उन्होंने ऐसी सेंधमारी की कि कांग्रेस आज तक ये सीट वापस नहीं ले पाई। पिछले तीस सालों से इस विधानसभा सीट पर रोहाणी परिवार का कब्जा है। इस बार विधानसभा चुनाव में उनके बेटे व शिष्य के बीच टक्कर है।
गौरतलब है कि जबलपुर की कैंट विधानसभा पिछले 30 सालों से भाजपा तथा रोहाणी परिवार को गढ़ है। इस सीट से ईश्वरदास रोहाणी साल 1993 से 2013 तक लगातार चार बार विधायक रहे। उनकी मृत्यु के बाद से पुत्र अशोक रोहाणी पिछले दो बार से विधायक हैं। इसके पहले यह सीट साल 1993 तक कांग्रेस पार्टी का गढ़ थी। भाजपा प्रत्याशी ईश्वरदास रोहाणी ने साल 1993 में हुए विधानसभा चुनाव में 29579 मत प्राप्त कर जीत प्राप्त की थी। कांग्रेस प्रत्याशी चंद्र मोहन को 22538 मत मिले थे और वे 7041 मतों से हारे थे। जनता दल के प्रत्याशी को 14443 मत प्राप्त हुए थे। साल 1998 में हुए विधानसभा चुनाव में उन्होंने इस सीट पर दूसरी बार जीत अर्जित की और विधानसभा उपाध्यक्ष बने। साल 2003 में हुए विधानसभा चुनाव में उन्होंने तीसरी बार जीत हासिल की और विधानसभा अध्यक्ष बने। साल 2008 में हुए विधानसभा चुनाव लगातार जीत हासिल कर पुनः विधानसभा अध्यक्ष बने।
साल 2013 के विधानसभा चुनाव के कुछ समय पूर्व उनका निधन हो गया था। इस चुनाव में उनके पुत्र अशोक रोहाणी को चुनाव मैदान में उतरे और जीत हासिल की। साल 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में उन्होंने लगातार दूसरी बार जीत हासिल की। इस विधानसभा चुनाव में उनकी टक्कर कांग्रेस प्रत्याशी व उनके पिता ईश्वरदास रोहाणी के शिष्य अभिषेक चौकसे उर्फ चिंटू से है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहणी को चिंटू चौकसे का राजनीतिक गुरु माना जाता है। उनकी राजनीति पाठशाला के चिंटू चौकसे शिष्य थे। साल 2008 में विधानसभा चुनाव के मतदान के दौरान हुए टकराव में उनका नाम मुख्य से उछला था। आपसी तालमेल बिगड़ने के कारण कैंट बोर्ड के पूर्व उपाध्यक्ष चिंटू चौकसे ने उनका साथ छोड़कर कांग्रेस का दामन संभाल लिया था। इस बार पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के बेटे अशोक रोहिणी तीसरी बार चुनाव मैदान में है। उनका मुकाबला पिता के राजनीतिक शिष्य चिंटू चौकसे से है।