मध्यप्रदेश में चुनावी बिसात बिछ चुकी है। कांग्रेस ने प्रदेश की 230 तो भाजपा ने 228 सीटों पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। आगामी 17 नवबंर को प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होगा। चुनाव से पहले अमर उजाला का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' प्रदेशभर के मतदाताओं का मन टटोलने निकला है। आज हमारा कारवां संस्कारधानी जबलपुर पहुंचा है, जहां सुबह के वक्त आम मतदाताओं से अमर उजाला ने चर्चा की और उनके मुद्दों को जानने की कोशिश की। अमर उजाला के मंच पर लोगों ने खुलकर अपनी बात रखी।
अमर उजाला से चर्चा में राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि जबलपुर पर्यटन का एक केंद्र है, लेकिन इसका विकास नहीं हो पाया है। पर्यटन मानचित्र में अब तक जबलपुर को जगह नहीं मिल पाई है।
अमरजीत सिंह बेदी ने कहा कि विकास का मुद्दा सबसे बड़ा है। परिवहन की सुविधा होनी चाहिए। हमारे यहां आम आदमी के लिए सुविधाएं काफी कम हैं। शहर का विकास तो हुआ है, लेकिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम की समस्या है। ट्रैफिक व्यवस्था भी काफी खराब है। प्रशासन ट्रैफिक कंट्रोल नहीं कर पा रहा है। एक मतदाता विनय पांडे ने कहा कि कांग्रेस ने अपने हितों को ध्यान में रखते हुए रानी दुर्गावती और मेडिकल कॉलेज का विखंडन कर दिया, जिससे यहां के अच्छे प्रोफेसर और बजट छिंदवाड़ा और भोपाल में चला गया, जिससे यहां की शिक्षा व्यवस्था पर असर पड़ा है।
आशीष संघी कहते हैं कि लोकल एम्प्लॉयमेंट की ओर सरकार को ध्यान देना चाहिए। यहां का जो यूथ है वो यहीं पढ़कर यहीं नौकरी पा सके, यहां के बच्चों को पढ़कर बाहर जाना होता है। सरकार को लोकल स्तर पर कुछ करना चाहिए। देवेंद्र अरोरा कहते हैं कि यहां एम्स खुलना चाहिए क्योंकि लोगों को इलाज के लिए नागपुर जाना पड़ता है। ये जबलपुर की एक बड़ी समस्या है, यहां मेडिकल का एक बड़ा केंद्र होना चाहिए।
शहर में जॉब अपॉर्चुनिटी नहीं है, आईआईटी नहीं हैं जिसके चलते बच्चों को बाहर जाकर नौकरी करना पड़ता है। छोटे परिवार हैं और उसके बाद भी उन्हें बाहर जाना पड़ता है।