ऑटो रिक्शा चालकों द्वारा सड़कों में धमाचौकड़ी मचाने तथा यातायात नियमों का पालन नहीं करने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की गयी थी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान नाराजगी वक्त करते हुए कहा कि याचिका विगत दस सालों से लंबित है। सरकार सिर्फ खानापूर्ति के लिए कार्रवाई संबंधित कागजी रिपोर्ट पेश कर रही है। युगलपीठ ने सरकार को पूर्व में पेश हलफनामे के अनुसार कार्रवाई के लिए दो सप्ताह का समय प्रदान किया है।
सतना बिल्डिंग निवासी अधिवक्ता सतीश वर्मा और नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की तरफ से दायर याचिकाओं में शहर की सड़कों पर बेखौफ होकर चलने वाले ऑटो लोगों की जान के दुश्मन बने हुए हैं। ऐसे ऑटो न सिर्फ शहर की यातायात व्यवस्था चौपट करते हैं, बल्कि इस हद तक सवारियों को बैठाते हैं कि हमेशा उनकी जान का खतरा बना रहता है। सवारी बैठाने के लिए ऑटो चालक बीच सड़क में कभी भी वाहन रोक देते हैं। शहर की सड़कों पर धमाचौकड़ी मचाने वाले ऑटो के संचालन को लेकर कई बार सवाल उठे, लेकिन जिला प्रशासन अब तक उनके खिलाफ कोई ठोस कदम उठा पाने में नाकाम रहा है। पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से बताया गया था कि इंदौर में 10 हजार तथा भोपाल में 15 हजार ऑटो बिना परमिट संचालित हो रहे हैं। ऑटो संचालन के विनियामक प्रावधान के तहत अधिकतम गति 40 किलोमीटर प्रतिघंटा निर्धारित की गयी है। ऑटो में व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम अनिर्वाय होगा जो परिवहन विभाग के सेन्ट्रल इंट्रीग्रेशन से लिंक होगा। इसके अलावा परमिट, क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकारियों तथा चालकों के कर्तव्य व आचारण भी निर्धारित किए गए हैं। प्रदेश भर में दस साल पुराने ऑटो-डीजल रिक्शा को परमिट जारी नहीं किया जायेगा। ऐसे ऑटो रिक्शा को सीएनजी में प्रतिस्थापित किया जायेगा।
पूर्व में याचिका की सुनवाई के दौरान उपस्थित हुए ट्रांसपोर्ट कमिश्नर को न्यायालय ने जमकर फटकार लगाते हुए तल्ख शब्दों में कहा था कि पुलिस व ट्रांसपोर्ट विभाग कार्रवाई नहीं कर सकते हुए न्यायालय किसी दूसरी एजेन्सी को नियुक्त कर दें। न्यायालय लापरवाही बरतने पर उन्हें कार्यमुक्त भी कर सकते हैं। अधिकारी न्यायालय के आदेशों को गंभीरता से नहीं लेते हैं इसलिए याचिका 2013 से लंबित है। युगलपीठ ने चेतवानी देते हुए कहा कि भविष्य में ऐसा बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। सरकार तरफ से कहा गया था कि संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट 2019 प्रदेश में 45 दिनों के अंदर लागू करने का आश्वासन भी दिया गया था।
याचिका पर मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से बताया गया कि पूरे प्रदेश में ऑटो को मॉडिफाई कर निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाया जाता है। ऑटो में तीन सवारियों के स्थान पर 15 से 20 व्यक्तियों को बैठाया जाता है। खुलेआम मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन किया जाता है। राजनैतिक दवाब के कारण यातायात के सुधार के लिए संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट 2019 प्रदेश सरकार द्वारा लागू नहीं किया गया है। संशोधित नियम में भारी जुर्माने के प्रावधान हैं, जिससे पूरे प्रदेश के ट्रैफिक में सुधार आ सकता है। याचिका की सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने सरकार के रवैये पर नाराजगी व्यक्त करते हुए संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट लागू करने का आदेश जारी किया है।