याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उसे पिछले 5-6 माह से वेतन नहीं दिया जा रहा था, उसने कई बार कलेक्टर के समक्ष वेतन भुगतान के लिए आवेदन दिया, लेकिन वेतन भुगतान करने के बजाय उनकी संविदा सेवा ही समाप्त कर दी गई।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मनरेगा में पदस्थ एक महिला संविदा कर्मी को वेतन मांगने पर सेवा से हटाने के लिए मामले को काफी गंभीरता से लिया है। जस्टिस संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने महिला कर्मी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सेवा खत्म करने पर रोक लगी दी और वेतन भुगतान करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही एकलपीठ ने मामले में संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
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यह मामला शहडोल जिले में मनरेगा में पदस्थ महिला गायत्री सिंह धुर्वे की ओर से दायर किया गया है। गायत्री ने अपनी याचिका कहा कि वह जिले के गोहपारू पंचायत में मनरेगा के तहत संविदा डाटा इंट्री ऑपरेटर पद पर तैनात थीं। पहले वह कार्यालय जिला पंचयात शहडोल में वर्ष 2012 से वर्ष 2022 तक कार्यरत थीं। राज्य शासन के आदेशानुसार याचिकाकर्ता को जनपद पंचायत मनरेगा में वर्ष 2022 में नियुक्ति दी गई थी। जिसके बाद शहडोल के कलेक्टर द्वारा 22 दिसंबर 2022 को संविदा सेवा समाप्त कर दी गई। इसके बाद महिला ने हाईकोर्ट की शरण ली।
वेतन मांगने पर कलेक्टर ने नौकरी से हटा दिया था...
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता गोपाल सिंह बघेल ने अदालत को बताया कि गायत्री सिंह को पिछले 5-6 माह से वेतन नहीं दिया जा रहा था, जिसके बाद उन्होंने कई बार कलेक्टर के समक्ष वेतन भुगतान के लिए आवेदन दिया, लेकिन वेतन भुगतान करने के बजाय उनकी संविदा सेवा ही समाप्त कर दी गई। साथ ही कोई कारण बताओ नोटिस भी नहीं दिया गया। मामले की सुनवाई दौरान हाईकोर्ट ने समस्त दस्तावेजों का अवलोकन करते हुए संविदा सेवा खत्म करने के फैसले पर रोक लगाते हुए संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया और याचिकाकर्ता को वेतन भुगतान के निर्देश दिए।