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Jabalpur: घर में घुसकर दंपती की हत्या करने वाले तीन लोगों को अंतिम सांस तक कारावास, हाईकोर्ट ने रद्द की फांसी

Wed, 20 Dec 2023 09:24 PM IST
दिनेश शर्मा अमर उजाला, न्यूज डेस्क, जबलपुर

सार

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने फांसी की सजा पाए तीन दोषियों के प्रति नरमी दिखाई है। उनमें सुधरने की संभावना देखते हुए उनकी फांसी रद्द कर सजा को आजीवन कारावास में तब्दील किया है। तीनों दोषियों ने एक घर में घुसकर पति-पत्नी की हत्या कर दी थी साथ ही तीन लोगों की हत्या की कोशिश की थी। 
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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घर में घुसकर दंपती की हत्या तथा परिवार के तीन सदस्यों पर प्राणघातक हमला करने वाले तीन आरोपियों की मृत्युदंड की सजा को हाईकोर्ट ने आजीवन कारावास में तब्दील किया है। हाईकोर्ट सुजय पॉल तथा बीके द्विवेदी की युगलपीठ ने आरोपियों की उम्र तथा उसमें सुधार व पुनर्वास की संभावना को देखते हुए मृत्युदंड की सजा अंतिम सांस तक आजीवन कारावास में तब्दील की है।
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अभियोजन के अनुसार गोरखपुर थानान्तर्गत सांई कॉलोनी निवासी गोलू कुशवाह के पड़ोस में रहने वाले रिश्तेदार विनय कुशवाहा से नाली के पानी की निकासी को लेकर विवाद हो गया था। गोलू घटना दिनांक 14 जून 2021 की रात लगभग 11 बजे घर पर खाना खा रहा था। तभी आरोपी विनय कुशवाहा, रवि कुशवाहा तथा राजा कुशवाह बाउंड्री कूद कर उनके घर में आए और पत्नी रूचि पर चाकू से हमला कर दिया। इसके बाद आरोपियों ने गोलू तथा उसके बेटे प्रतीक पर भी चाकू से हमला कर दिया। भाई पुष्पराज तथा उसकी पत्नी नीलम बीच बचाव में आए तो आरोपियों ने उन पर भी चाकू व लाठियों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी फरार हो गए। घायलों को उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया था। डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांच के बाद पुष्पराज तथा उसकी पत्नी को मृत घोषित कर दिया था।

पुलिस ने हत्या, हत्या के प्रयास सहित अन्य धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया था। प्रकरण की सुनवाई के बाद पेश किए गए साक्ष्य व गवाहों के आधार पर न्यायालय ने आरोपियों को दोषी ठहराया था। साथ ही आदेश में कहा कि इस प्रकार के जघन्य अपराध की परिकल्पना समाज की रूह कंपा देने वाली है। जो व्यक्ति नाली के मामूली विवाद पर निर्मम हत्या कर सकता है वह व्यक्ति सभ्य समाज के लिए आतंक मात्र है।
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मृत्युदंड की पुष्टि के लिए प्रकरण को हाईकोर्ट रेफर किया गया था। सजा के खिलाफ आरोपियों ने भी अपील दायर की थी। याचिकाओं की सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने पाया कि आरोपियों की उम्र 35, 24 व 23 साल है। उन्होंने एक राय होकर दो परिवारों पर हमला किया और कोई पश्चाताप नहीं दिखाया था। आरोपी निचले व मध्य तबके हैं और अपराध समाज के बडे़ वर्ग को भयभीत करने के लिए नहीं किया है। उनके सुधार व पुनर्वास की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। युगलपीठ ने उक्त आदेश के साथ मृत्युदंड की सजा को आजीवन कारावास में तब्दील कर दिया। याचिकाकर्ताओं की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष दत्त ने पैरवी की। 
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