ऑक्सीजन सिलिंडर (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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मध्यप्रदेश में कोरोना का बहुत बुरा हाल है और राज्य के कई इलाकों से ऑक्सीजन की कमी की शिकायतें सामने आ रही है। हालांकि राज्य सरकार पिछले तीन दिनों से दावा कर रही है कि राज्य में मरीजों के लिए ऑक्सीजन पर्याप्त है और ऑक्सीजन का पूरा इंतजाम हो गया है।
लेकिन इसके बाद भी ऑक्सीजन की कमी से कोविड मरीजों की मौत थमने का नाम नहीं ले रही है। मध्यप्रदेश के जबलपुर में ऑक्सीजन की कमी से पांच मरीजों की मौत होने की खबर सामने आई है। जबलपुर के दो अस्पतालों में बीते 24 घंटे में पांच मरीजों की ऑक्सीजन की कमी से मौत हो गई है।
इन दोनों अस्पतालों में दिनभर मरीजों के परिवार वालों ने हंगामा मचाया। हालांकि अस्पताल प्रबंधन इस बात को मानने को तैयार नहीं है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि पांच मरीजों की हालत गंभीर थी और किसी की भी मौत ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई है।
हालांकि मृतक मरीज के परिवार वालों ने आरोप लगाया है कि अस्पताल झूठ बोल रहा है। वहीं दोनों मामलों की जांच शुरू कर दी गई है। बता दें कि पहली मौत बलदेव बाग स्थित मोडिसिटी अस्पताल में 82 वर्षीय गौरी बाई की हुई है। उनके परिवार वालों का आरोप है कि ऑक्सीजन का प्रेशर कम होने की वजह से गौरी की मौत हुई है।
उनके बेटे अनिल खत्री ने जानकारी दी कि मां लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थीं और उनका ऑक्सीजन स्तर 99 पर था। अनिल ने जानकारी दी कि बुधवार को उनकी मां का ऑक्सीजन प्रेशर अचानक से कम हुआ और मां की तड़पकर मौत हो गई। वहीं दूसरी घटना बरगी स्थित सुख सागर मेडिकल कॉलेज में हुई।
यहां चार मरीजों को ऑक्सीजन की सप्लाई समय पर नहीं हुई। बीती रात जबलपुर के अस्पतालों में ऑक्सीजन कम रही, इसलिए मेडिकल कॉलेज में भी सप्लाई नहीं हो पाई। इसके पीछे का कारण यह है कि रिछाई स्थित लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट में तकनीकी खराबी आ गई थी।